उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का ढांचा अधूरा, मान्यता प्रक्रिया में देरी
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण गठन के तीन माह बाद भी विभागीय ढांचे के अभाव में जूझ रहा है, जिससे मदरसों ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई से बनाई गई है

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अशोक केडियाल, जागरण, देहरादून। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन के करीब तीन माह बीतने के बाद भी विभागीय ढांचा तैयार नहीं हो पाया है। इससे प्राधिकरण के कामकाज के साथ ही अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता देने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। जबकि प्राधिकरण ने 452 मदरसों का पूरा लेखा जोखा तैयार कर सरकार को भेज दिया है।
भंग किए गए मदरसा बोर्ड से मिले नौ कार्मिकों के सहारे प्राधिकरण का संचालन करना चेयरमैन के लिए चुनौती बना हुआ है। वहीं, रजिस्ट्रार की तैनाती नहीं होने से मान्यता संबंधी कार्यों के समयबद्ध निस्तारण में दिक्कतें आ रही हैं।
नौ कार्मिकों के भरोसे प्राधिकरण
प्राधिकरण को मदरसा बोर्ड से पांच लिपिक, तीन तकनीकी कर्मी और एक कैशियर मिला है। जबकि नियमित कामकाज के लिए एक कुलसचिव, इंस्पेक्टर, चालक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी समेत अन्य पदों की आवश्यकता है। उपलब्ध कार्मिकों में अपेक्षित दक्षता की कमी भी कामकाज की गति प्रभावित कर रही है। कुछ कर्मियों के असहयोग के कारण भी कार्यों के संचालन में अड़चनें आने की बात सामने आई है।
इस माह 65 संस्थानों को मान्यता देने का लक्ष्य
प्राधिकरण अब तक 35 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता दे चुका है। इस माह के अंत तक करीब 65 संस्थानों को मान्यता देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। शिक्षा विभाग में मान्यता के लिए आवेदन करने वाले 198 संस्थानों में से करीब 80 के आवेदनों को पोर्टल पर मंजूरी देकर प्राधिकरण को भेजा गया है।
ऐसे में तय समयसीमा में लक्ष्य पूरा करने के लिए प्रक्रिया में तेजी लाना जरूरी है। राज्य में 452 में से 227 मदरसे कार्रवाई से पहले बंद कर दिए गए, 19 को प्रशासन से सील किया। अभी करीब 100 मदरसों के आवेदन स्वीकार करने का मामला शिक्षा विभाग में लंबित है।
विभागीय ढांचे के गठन और शिक्षा विभाग में मान्यता संबंधी लंबित मामलों के बारे में शासन को पत्र भेजकर अवगत करा दिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शासन इस दिशा में आवश्यक कदम उठाएगा, जिससे प्राधिकरण का कामकाज व्यवस्थित हो सके और मान्यता प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
प्रो. सुरजीत सिंह गांधी, चेयरमैन
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण
यह भी पढ़ें- देहरादून के विकास नगर में धर्मावाला चौक पर बेकाबू ट्रक साइबर कैफे में घुसा, बड़ा हादसा टला
यह भी पढ़ें- देहरादून में बड़ी साइबर ठगी, बुजुर्ग दंपती को 50 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर ठगे 45.87 लाख रुपये
