उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर हादसों की जांच रिपोर्टें फाइलों में कैद, नहीं की जाती राज्य सरकार से साझा, अब तक 22 दुर्घटनाएं
उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं की जांच रिपोर्टें राज्य सरकार से साझा नहीं की जाती हैं, जिससे भविष्य में सुरक्षा सुधारों ...और पढ़ें
-1793377389977_m.webp)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। उत्तराखंड में हेलीकाप्टर दुर्घटनाओं की जांच तो हर बार होती है, लेकिन उसके निष्कर्ष सरकारी फाइलों से बाहर नहीं आ पाते। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) दुर्घटना के बाद जांच टीम भेजकर तकनीकी और अन्य पहलुओं की पड़ताल कराता है, लेकिन जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट में क्या सामने आया, इसकी जानकारी राज्य सरकार को नहीं मिल पाती।
गत वर्ष हुई पांच हेलीकाप्टर दुर्घटनाओं की जांच के निष्कर्ष भी अभी तक सरकार के साथ साझा नहीं किए गए, जबकि केदारनाथ में हुई हेली दुर्घटना में बढ़ते दबाव के कारण जांच की जानकारी अगस्त में सरकार से साझा की गई थी।
प्रदेश में हेली सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। चारधाम यात्रा समेत पर्यटन और अन्य आवश्यक सेवाओं में हेलीकाप्टरों की भूमिका बढ़ने के साथ दुर्घटनाओं की चुनौती भी बनी हुई है। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद से अब तक 22 हेली दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
इनमें से 11 दुर्घटनाओं में 56 व्यक्तियों की मृत्यु हुई है। शेष 11 दुर्घटनाएं घटनाओं में जनहानि नहीं हुई। नियमानुसार प्रत्येक हेलीकाप्टर दुर्घटना की जांच अनिवार्य है। इसके लिए डीजीसीए और एयर इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो जैसी एजेंसियां स्वयं ये जांच करती हैं।
दुर्घटना के तत्काल बाद जांच टीमें घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाती हैं और तकनीकी पहलुओं का परीक्षण करती हैं। हालांकि, जांच प्रक्रिया पूरी होने और रिपोर्ट बनने में लंबा समय लगता है।
इसके बाद रिपोर्ट में सामने आए कारणों की जानकारी भी राज्य सरकार और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) तक नहीं पहुंच पाती। तर्क दिया जाता है कि दुर्घटना के लिए जिम्मेदारी तय करने और संबंधित कार्रवाई का अधिकार डीजीसीए के स्तर पर होता है।
इसमें राज्य सरकार अथवा यूकाडा की सीधी भूमिका नहीं होती। लेकिन दुर्घटनाओं के कारणों की जानकारी राज्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। इससे हेली सेवाओं के संचालन, सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था में जरूरी सुधार किए जा सकते हैं। जांच निष्कर्ष साझा नहीं होने से दुर्घटनाओं से सबक लेकर भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।