उत्तराखंड में 344 हिमनद झीलों की पहचान, हाई रिस्क वाली 13 लेक में से छह का बैथीमेट्री सर्वे पूरा
उत्तराखंड में राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र ने 344 हिमनद झीलें चिह्नित की हैं, जिनमें से 13 को ग्लोफ के उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है।

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राज्य ब्यूरो, देहरादून। राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र ने उत्तराखंड में 344 हिमनद झीलें चिह्नित की हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं तकनीकी संस्थाओं ने इनमें से 13 को ग्लोफ (ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड) की दृष्टि से उच्च जोखिम वाली झीलों के रूप में चयनित किया है। इनमें बागेश्वर, टिहरी व उत्तरकाशी की एक-एक, चमोली की चार, पिथौरागढ़ की छह झीलें शामिल हैं।
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार उच्च जोखिम वाली छह हिमनद झीलों का बैथीमेट्री सर्वे किया जा चुका है। इनमें चमोली की सरस्वती ताल व वसुंधरा ताल, उत्तरकाशी की केदारताल तथा पिथौरागढ़ की मबांग, प्यूनग्रू एवं स्युंक्तियांक्ति झील हैं।
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सर्वे में इनकी गहराई, जलधारण क्षमता एवं अन्य महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए गए हैं, जिनके आधार पर संभावित ग्लाेफ जोखिम का वैज्ञानिक आकलन एवं आवश्यक आपदा प्रबंधन तैयारियों को और मजबूत किया जाएगा।
साथ ही ग्लोफ की संभावित घटनाओं के दृष्टिगत निचले क्षेत्रों में स्थित बस्तियों, सड़कों, पुलों, जलविद्युत परियोजनाओं एवं अन्य महत्वपूर्ण अवस्थापना को संभावित खतरे को देखते हुए पूर्व तैयारी और समयबद्ध चेतावनी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
दल की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान
मुख्य सचिव ने मंगलवार को वसुंधरा ताल में अर्ली वॉर्निंग सिस्टम स्थापित करने के लिए विज्ञानियों व तकनीकी विशेषज्ञों के जिस दल को रवाना किया, उसकी सुरक्षा आवागमन और सहयोग का ध्यान भी रखा गया है। इसके लिए एसडीआरएफ, एनडीआरएफ तथा आइटीबीपी के जवान भी दल के साथ रहेंगे।
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यूएसडीएमए द्वारा अभियान के लिए आवश्यक समन्वय एवं लाजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। दल को को सेटेलाइट फोन तथा लो अर्थ आर्बिट डिवाइस भी उपलब्ध कराई गई है, उसका संचार व समन्वय यूएसडीएमए के साथ बना रहे।
