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उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों की निगरानी को लगेंगे अत्याधुनिक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम, सीएम धामी ने दिए निर्देश

Published: Fri, 28 Aug 2026 11:30 AM (GMT+05:30)

तिब्बत में ग्लेशियर झील टूटने से नेपाल में आई बाढ़ के बाद उत्तराखंड में 13 संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की सुरक्षा ...और पढ़ें

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राज्य ब्यूरो, देहरादून। तिब्बत में ग्लेशियर झील टूटने से नेपाल में आई भीषण बाढ़ को देखते हुए उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों से संभावित खतरों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की नियमित एवं वैज्ञानिक निगरानी के साथ अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने और आवश्यकता के अनुसार इनकी संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

गुरुवार को सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन के नेतृत्व में आपदा प्रबंधन की बैठक हुई। जिसमें सचिव ने बताया कि मुख्यमंत्री ने संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का व्यापक सर्वेक्षण और विज्ञानी अध्ययन कराने को कहा है। इसमें झीलों के जलस्तर, आकार में बदलाव, आसपास के भू-भाग और संभावित जोखिम क्षेत्रों का नियमित आकलन किया जाएगा। आधुनिक सेंसर, जलस्तर मापक उपकरण और संचार प्रणालियों के माध्यम से रियल टाइम सूचना जुटाने की व्यवस्था भी की जाएगी।

सरस्वती ताल व केदारताल का सर्वेक्षण जल्द

राज्य में 13 ग्लेशियर झीलें संवेदनशील श्रेणी में चिह्नित हैं, जिनमें से चार का सर्वेक्षण हो चुका है। जल्द ही चमोली स्थित सरस्वती ताल और उत्तरकाशी स्थित केदारताल के सर्वेक्षण के लिए विशेषज्ञ दल रवाना होगा। अध्ययन में झीलों की वर्तमान स्थिति और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव का आकलन किया जाएगा। नेपाल की आपदा के बाद राज्य सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला और सेवानिवृत्त ले. कर्नल रघुवीर सिंह भंडारी ने जिलाधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा की।

‘राज्य के संभावित 13 ग्लेशियर झीलों की नियमित एवं वैज्ञानिक निगरानी के साथ-साथ संवेदनशील क्षेत्रों में अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने तथा आवश्यकतानुसार इनकी संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। हिमालयी क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं को लेकर अति संवेदनशील है। आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन पूर्व में इसकी विज्ञानी निगरानी से जानमाल के नुकसान को रोका जा सकता है।’- पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री