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उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर लगाम कसने को जिला स्तरीय समितियां गठित

Published: Tue, 13 Oct 2026 06:07 PM (IST)

उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की जा ...और पढ़ें

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केदार दत्त, जागरण देहरादून। उत्तराखंड में गहराते मानव-वन्यजीव संघर्ष पर अंकुश लगाने को अब प्रत्येक जिले में ग्राम स्तर पर हाटस्पाट (संघर्ष संभावित क्षेत्र) की पहचान कर उनकी मैपिंग की जाएगी। इसके आधार पर संवेदनशील क्षेत्रों में संघर्ष की रोकथाम और प्रबंधन के प्रभावी उपाय किए जाएंगे।

यह कार्य जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित होने वाली जिला स्तरीय मानव वन्यजीय संघर्ष न्यूनीकरण एवं प्रबंध समिति सुनिश्चित कराएगी। इस संबंध में शासनादेश जारी होने के साथ ही अब जिलों में समिति के गठन की कवायद शुरू की गई है।

मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक नीना ग्रेवाल ने सभी नोडल प्रभागीय वनाधिकारियों को पत्र भेजकर जिलाधिकारियों से समन्वय कर इन समितियों का गठन जल्द कराने को कहा है। समिति में पुलिस, राजस्व, कृषि, शिक्षा, सूचना, ग्राम्य विकास, ऊर्जा, स्थानीय निकाय विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों के तीन ग्राम प्रधान भी बतौर सदस्य शामिल किए जाएंगे।

राज्य का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र होगा, जहां वन्यजीवों के आतंक ने आमजन की नींद न उड़ाई हो। इस संघर्ष की रोकथाम को वन विभाग की ओर से उठाए जा रहे कदम नाकाफी साबित हो रहे हैं।

इसे देखते हुए इसकी रोकथाम में जिला प्रशासन के साथ ही विभागों की भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है। इस सिलसिले में वन विभाग की ओर से भेजे गए जिला स्तर पर संघर्ष न्यूनीकरण एवं प्रबंधन समिति के गठन के प्रस्ताव को शासन ने हरी झंडी दे दी है। इस संबंध में जारी शासनादेश में समिति के कार्य भी निर्धारित कर दिए गए हैं।

ये कार्य करेगी समिति

-ग्राम स्तर पर हाटस्पाट का चिह्नांकन व मैपिंग।

-तात्कालिक, मध्यावधि व दीर्घकालिक उपायों की पहचान व रणनीति का क्रियान्वयन।

-क्विक रिस्पांस टीमों की तैनाती एवं क्षेत्र में नियमित गश्त।

-ई-सर्विलांस और एआइ आधारित उपकरणों का उपयोग।

-प्रभाग स्तर पर मानव वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण प्रकोष्ठ का गठन।

-गांवों-शहरों के संवेदनशील क्षेत्रों में सोलर लाइट की व्यवस्था।

-ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को प्रभावी कार्रवाई।

-विद्यालयों व छात्रों की सुरक्षा को ठोस उपाय।

-वन सीमा पर सोलर समेत बायोफेंसिंग की स्थापना।

राज्य में इस साल वन्यजीवों के हमले

(एक जनवरी से 30 सितंबर तक)

वन्यजीव मृतक घायल
गुलदार 17 75
बाघ 12 04
सांप 10 102
हाथी 09 04
भालू 04 40
मगरमच्छ 03 03
बंदर-लंगूर 00 154
जंगली सूअर 00 15
ततैया 00 10

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