विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

उत्तराखंड में हल्द्वानी से दून तक बनेंगे बिजली बैंक, बड़े पैमाने पर स्टोर होगी इलेक्ट्रिसिटी... लागत 500 करोड़

Published: Sun, 20 Sep 2026 03:45 PM (IST)

उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) राज्य भर में विद्युत सब स्टेशनों को बिजली बैंक में बदल रहा है।

News Article Hero Image
timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

अश्वनी त्रिपाठी, देहरादून। राज्य की विद्युत वितरण कंपनी उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) अब सिर्फ बिजली आपूर्ति का काम नहीं करेगी, बल्कि बिजली को बड़े पैमाने पर स्टोर कर जरूरत पर सप्लाई करेगी। आसान भाषा में कहें तो अब बिजली घर बिजली बैंक का काम करेंगे।

ग्रिड में बिजली उपलब्धता अधिक होगी अथवा जब बिजली की मांग कम होगी, तब बिजली बैंक में लगाई गई बैटरी चार्ज की जाएगी। जब मांग बढ़ेगी या ग्रिड को अतिरिक्त बिजली की जरूरत होगी तो इसी स्टोरेज से बिजली वापस नेटवर्क में भेजी जाएगी।

स्टोरेज से वापस नेटवर्क में भेजी जाएगी बिजली 

यूपीसीएल ने इसके लिए राज्य के विभिन्न सबस्टेशनों पर कुल 100 मेगावाट क्षमता व 250 मेगावाट-घंटे स्टोरेज क्षमता के स्टैंडअलोन बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की है। परियोजना को तीन क्लस्टरों में बांटा गया है। तीनों की अनुमानित लागत करीब 502 करोड़ रुपये है।

क्लस्टर-ए में 36 मेगावाट/90 मेगावाट-घंटे, क्लस्टर-बी में 23 मेगावाट/57.5 मेगावाट-घंटे और क्लस्टर-सी में 41 मेगावाट/102.5 मेगावाट-घंटे क्षमता का सिस्टम लगाया जाएगा। परियोजना में 100 मेगावाट की क्षमता पर बैटरी लगभग 2.5 घंटे तक बिजली उपलब्ध करा सकती है।

यह भी पढ़ें- उत्तराखंड में स्मार्ट मीटर पर उठे थे सवाल, सही निकले यूपीसीएल के बिल

पीक डिमांड में मिलेगी राहत

उत्तराखंड में बिजली की मांग दिन के अलग-अलग समय में बदलती रहती है। खासकर शाम के समय मांग बढ़ने पर महंगी बिजली खरीदने या दूसरे स्रोतों से तत्काल आपूर्ति जुटाने की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में बिजली बैंक ग्रिड को सहारा दे सकता है।

10 से ज्यादा इलाकों से जुड़ेगा स्टोरेज

तीन क्लस्टर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में लगाए जाएंगे। क्लस्टर-ए में रुद्रपुर, काशीपुर, हल्द्वानी और पिथौरागढ़, क्लस्टर-बी में देहरादून ग्रामीण और शहरी क्षेत्र तथा क्लस्टर-सी में उत्तरकाशी, हरिद्वार, रुड़की और टिहरी शामिल हैं।

यह भी पढ़ें- यूपीसीएल में बिजली सुरक्षा को लेकर सख्त रुख, हादसों पर तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही

सिस्टम यूपीसीएल के 33/11 केवी सबस्टेशनों के आसपास लगाया जाएगा। बैटरी यूपीसीएल अपने खर्च से खरीदकर नहीं लगाएगा, बल्कि इसे पीपीपी मोड में लगाया जाएगा। यूपीसीएल अपने सबस्टेशन की भूमि कंपनी को उपयोग के लिए उपलब्ध कराएगा।