धामी सरकार के फैसलों से मजबूत हुई भगवा राजनीति, कुंभ के शंखनाद के बीच और चटख होगी हिंदुत्व की सियासत
धामी सरकार ने समान नागरिक संहिता और धर्मांतरण कानून जैसे फैसलों से हिंदुत्व की राजनीति को मजबूत किया है। आगामी ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। फाइल फोटो

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अश्वनी त्रिपाठी, देहरादून। हरिद्वार में कुंभ का शंखनाद होगा तो गंगा के घाटों से उठने वाली आस्था की लहरें राजनीतिक गलियारों तक भी पहुंचेंगी। आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले होने वाले कुंभ को भाजपा हिंदुत्व की राजनीति का बड़ा मंच बनाने की तैयारी में है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पिछले पांच वर्षों में समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण कानून में सख्ती और देवभूमि की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान से जुड़े फैसले लेकर हिंदुत्व की राजनीति को नए कलेवर दे चुके हैं। अब कुंभ में सनातन परंपरा, संत समाज और धार्मिक पर्यटन को सरकार की उपलब्धियों से जोड़कर हिंदुत्व के एजेंडे काे चुनावी अभियान में प्रमुखता देने की तैयारी है।
समान नागरिक संहिता इसका सबसे प्रमुख उदाहरण
धामी सरकार ने हिंदुत्व को कानून, प्रशासन और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े निर्णयों के माध्यम से सामने रखा। समान नागरिक संहिता इसका सबसे प्रमुख उदाहरण है। उत्तराखंड स्वतंत्र भारत में यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बना। भाजपा ने इसे समानता, महिला अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों के साथ अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया।
वहीं, धर्मांतरण विरोधी कानून में सख्ती और धार्मिक स्थलों के आसपास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को सरकार ने कानून-व्यवस्था और देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर प्रचारित किया। इन फैसलों ने भाजपा को अपने वैचारिक एजेंडे को शासन की नीतियों के माध्यम से सामने रखने का अवसर दिया।
हिंदुत्व की राजनीति को मजबूती देने में धार्मिक पर्यटन और तीर्थस्थलों के विकास की भूमिका भी अहम रही। चारधाम यात्रा में सुविधाओं का विस्तार, मंदिरों तक पहुंच के प्रयास व धार्मिक स्थलों के आसपास आधारभूत ढांचे का विकास सरकार के लिए आस्था और विकास को एक साथ प्रस्तुत करने का आधार बने। भाजपा की रणनीति इन कार्यों को सनातन परंपराओं के सम्मान और उत्तराखंड की विशिष्ट धार्मिक पहचान के तौर पर चुनाव में प्रस्तुत करने की है। कुंभ 2027 इसका मंच बनेगा।
भाजपा देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के बीच देवभूमि की पहचान और सनातन परंपराओं का संदेश पहुंचाने की रणनीति बना रही है। ऐसे में कुंभ को भाजपा धार्मिक आयोजन के साथ अपनी वैचारिक पहचान, शासन की उपलब्धियों और चुनावी संदेश को एक सूत्र में पिरोने के अवसर के तौर पर देख रही है।
