कांग्रेस के दिल्ली प्रदर्शन में उत्तराखंड से जुटेंगे पांच हजार कार्यकर्ता, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने जारी किए निर्देश
कांग्रेस के 12 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में उत्तराखंड से पांच हजार कार्यकर्ता शामिल होंगे। प्रदेश अध्यक्ष ...और पढ़ें

फाइल फोटो

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राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। कांग्रेस के 12 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन में उत्तराखंड से पांच हजार कार्यकर्ता शामिल होंगे। पार्टी हाईकमान के निर्देश के बाद प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस संबंध में पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। प्रदर्शन में अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक तैयारियां की जा रही हैं।
उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी एवं सांसद कुमारी सैलजा ने शनिवार को जूम मीटिंग के माध्यम से प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों के साथ बैठक की। करीब डेढ़ घंटे चली बैठक में दिल्ली प्रदर्शन की तैयारियों, कार्यकर्ताओं की भागीदारी और संगठन की भूमिका पर चर्चा की गई।
राष्ट्रीय महामंत्री संगठन केसी वेणुगोपाल के निर्देशों के अनुरूप कार्यक्रम को सफल बनाने पर जोर दिया गया। बैठक में प्रदेश कांग्रेस के नेताओं को कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बनाने और निर्धारित संख्या में भागीदारी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। जिला एवं महानगर इकाइयों को भी इस संबंध में सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं।
जूम मीटिंग में जुड़े पूर्व सीएम हरीश रावत
मुख्यमंत्री हरीश रावत की दिल्ली प्रदर्शन में भागीदारी करेंगे। शनिवार को कांग्रेस की उत्तराखंड प्रभारी की जूम-मिटिंग में करीब डेढ़ घंटे तक पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जुड़े रहे और अपने विचार भी साझा किए।
दिल्ली में सीजेपी के आंदोलन को बलपूर्वक दबाने का प्रयास: कांग्रेस
कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता डा. प्रतिमा सिंह ने दिल्ली में सीजेपी के आंदोलन के आलोक में केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र के इशारे पर आंदोलनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों के विपरीत है।
एक बयान में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक और संगठन को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें उठाने तथा सरकार की नीतियों का विरोध करने का संवैधानिक अधिकार है। असहमति लोकतंत्र की ताकत है।
सरकार को आंदोलनकारियों की आवाज दबाने के बजाय उनकी मांगें सुनकर संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से आंदोलन के दौरान हुई कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने, नागरिक अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करने और शांतिपूर्ण विरोध के लिए अनुकूल वातावरण बनाने की मांग की।
