जागरण संवाददाता, देहरादून। Uttarakhand Board Examination उत्तराखंड में बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम के फार्मूले को अमलीजामा पहनाना आसान नहीं होगा। वजह यह कि राज्य बोर्ड और शिक्षा विभाग ने सालभर में एक मासिक परीक्षा के अलावा दूसरी कोई परीक्षा आयोजित नहीं की। न ही स्कूलों ने अपने स्तर से कोई परीक्षा आयोजित की। अब शिक्षा विभाग बोर्ड कक्षाओं का परिणाम तैयार करने के लिए सालभर में हुई परीक्षाओं की रिपोर्ट मांग रहा है। गुरुवार को अपर निदेशक गढ़वाल मंडल ने इसके लिए आदेश भी जारी कर दिए। अब स्कूल पशोपेश में हैं कि जब परीक्षाएं हुई ही नहीं तो अंक कहां से भेजें।

पिछले वर्ष कोरोना महामारी की दस्तक के बाद सबसे पहले स्कूल बंद हुए और इसके बाद बोर्ड की परीक्षाएं रद हुईं। हालांकि, राज्य बोर्ड की ज्यादातर परीक्षाएं आयोजित हो चुकी थीं। फिर भी बोर्ड ने सीबीएसई का पासिंग पैटर्न अपनाते हुए जिन विषयों की परीक्षाएं आयोजित हो चुकी थीं, उनमें से बेस्ट तीन विषयों के अंकों के आधार पर छात्रों को पास कर दिया। इस साल हालात अलग हैं। प्रदेश में दो नवंबर से बोर्ड कक्षाओं के लिए स्कूल खोले गए थे। स्थिति सामान्य होती देख राज्य बोर्ड चार जून से बोर्ड परीक्षाएं और इससे पहले प्री बोर्ड परीक्षाएं करवाने की तैयारी में था, लेकिन कोरोना संक्रमण दोबारा बढ़ने पर मार्च में स्कूल दोबारा बंद हो गए।

पूरे सत्र में एससीईआरटी ने किसी तरह से आनलाइन माध्यम से एक परीक्षा करवाई। इस परीक्षा में भी 30 फीसद से ज्यादा छात्र-छात्राएं संसाधनों की कमी के चलते शामिल नहीं हो सके। सामान्य दिनों में अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं अक्टूबर तक हो जाती हैं, लेकिन इस वर्ष ये परीक्षाएं भी आयोजित नहीं हुईं। स्कूल खुलने के बाद प्री बोर्ड परीक्षाएं होने के उम्मीद थी, लेकिन सरकारी स्कूल बोर्ड एवं विभाग के आदेश का इंतजार ही करते रहे और कोरोना संक्रमण बढऩे के बाद दोबारा स्कूल बंद हो गए। हालांकि, कुछ सहायता प्राप्त अशासकीय स्कूलों ने आदेश का इंतजार करने की बजाय अपने स्तर से मासिक एवं प्री बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन किया था। अब यही अंक छात्रों और स्कूलों के काम आएंगे।

शिक्षा महानिदेशक विनय शंकर पांडेय का कहना है कि शिक्षक और अधिकारियों के सुझाव के बाद सरकारी एवं अशासकीय स्कूलों में हुई परीक्षाओं का सर्वे कर रिकार्ड मांगा गया है। नवंबर के बाद मार्च तक चार महीनों में कोई तो परीक्षा आयोजित हुई ही होगी, जिसे बोर्ड के परिणाम में शामिल किया जा सके। जिलों से रिपोर्ट आने के बाद सोमवार को दोबारा बैठक होनी है, जिसके बाद आगे निर्णय लिया जाएगा।

अंकों में फर्जीवाड़ा होने का अंदेशा

चाहे कारण जो भी रहा हो, लेकिन प्रदेश के ज्यादातर सरकारी स्कूल सालभर में कोई भी परीक्षा करवाने में असफल रहे हैं। अब शिक्षा विभाग ने रिपोर्ट मांगी है तो कुछ तो जवाब देना होगा। ऐसे में छात्रों के अंकों में फर्जीवाड़ा होने का अंदेशा भी लगाया जा रहा है। शिक्षक एवं प्रधानाचार्यों का मानना है कि अपना गुड वर्क दिखाने के लिए कुछ स्कूल बिना परीक्षा के अंक भेजने से भी बाज नहीं आएंगे। हालांकि, कई स्कूलों ने अपना पल्ला झाड़ते हुए विभाग के सिर ठीकरा फोड़ दिया है कि जब बोर्ड और विभाग ने परीक्षाओं के आदेश नहीं दिए तो परीक्षा कैसे करवाते।

पिछली कक्षाओं के परिणाम को आधार बनाने का सुझाव

राज्य में बोर्ड परीक्षा परिणाम पर शिक्षकों ने अपने सुझाव पेश करना शुरू कर दिया है। माध्यमिक शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर पिछली कक्षाओं के आधार पर बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम तैयार करने का सुझाव दिया है। संघ ने शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों से सालभर में हुई परीक्षाओं के रिकार्ड मांगे जाने पर भी आपत्ति जताई है। संघ के जिला महामंत्री अनिल नौटियाल ने कहा कि इस सत्र में बोर्ड कक्षाओं के लिए ज्यादातर स्कूलों में कोई परीक्षाएं ही आयोजित नहीं हुई।

नवंबर के बाद स्कूल खुले तो लेकिन छात्रों की उपस्थिति पूरी नहीं थी। न ही शिक्षा विभाग या बोर्ड ने मासिक परीक्षा, अर्द्धवार्षिक या प्री बोर्ड परीक्षाओं के लिए कोई आदेश या कार्यक्रम जारी किया। जब स्कूलों में परीक्षाएं नहीं हुई, न ही पूरे छात्र पहुंचे तो इस सत्र के अंक कहां से देंगे। उन्होंने अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा गढ़वाल मंडल महावीर सिंह बिष्ट को सुझाव पत्र प्रेषित कर पिछली कक्षाओं एवं आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर बोर्ड का परिणाम तैयार करने की अपील की।

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Edited By: Raksha Panthri