जागरण संवाददाता, देहरादून। कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार के बीच देश में हर तरफ ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचा हुआ है। इस मोर्चे पर देहरादून के लिए सुकून की बात यह है कि फिलहाल यहां ऑक्सीजन की आपूर्ति पर्याप्त है। मगर, ऑक्सीजन की एकाएक बढ़ी मांग ने इसके मूलभूत संसाधनों जैसे कि ऑक्सीजन सिलिंडरों आदि का टोटा खड़ा कर दिया है। इसका असर यह हो रहा है कि ऑक्सीजन होने के बावजूद मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पा रही। ऐसे में यूज एंड थ्रो ऑक्सीजन सिलिंडर मददगार साबित हो रहे हैं।

बीते एक माह में देहरादून में ऑक्सीजन की खपत सामान्य दिनों की तुलना में छह गुना तक बढ़ गई है। इस मांग को पूरा करने के लिए अब तक कोई सुदृढ़ व्यवस्था नहीं बन पाई है। हाल यह है कि कहीं ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं हैं तो कहीं इससे संबंधित चिकित्सकीय उपकरण। 

ऐसे में मरीजों को राहत देने के लिए बाजार में यूज एंड थ्रो ऑक्सीजन सिलिंडर के रूप में बड़ा सहारा पहुंच गया है। देहरादून में फिलहाल यह सिलिंडर कांवली रोड स्थित अंबिका गैसेज के पास उपलब्ध है। अंबिका गैसेज के संचालक सुरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि इस सिलिंडर की काफी डिमांड थी। चार दिन पहले किसी मित्र से उन्हें डॉ. हेल्थ लैब्स फार्मा के यूज एंड थ्रो ऑक्सीजन सिलिंडर की जानकारी मिली। उन्होंने तुरंत कंपनी से संपर्क कर इसका ऑर्डर दे दिया।

सील नहीं खुलने पर दो साल सुरक्षित

यूज एंड थ्रो ऑक्सीजन सिलिंडर की एक खासियत यह भी है कि सील नहीं खुलने की स्थिति में इसे दो साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है। लेकिन, सील खुलने के बाद इसे एक महीने के भीतर इस्तेमाल करना होता है। एमके कौल ने बताया कि इसके लिए सिलिंडर की पैकिंग और मजबूती का विशेष ध्यान रखा जाता है। इसे गर्म जगह से दूर रखना होता है। कौल ने बताया कि बड़े सिलिंडर से ऑक्सीजन लेने पर फ्लो मीटर के जरिये ऑक्सीजन पानी से होकर गुजरती है। इसमें पानी का विकल्प नहीं है, इसलिए पानी बाहर से पीना जरूरी है।

शहर में मांग के सापेक्ष ऑक्सीजन सिलिंडर बेहद कम

सुरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि शहर में मांग के सापेक्ष ऑक्सीजन सिलिंडर अभी काफी कम हैं। हर दिन उनके पास ही औसतन 150 लोग ऑक्सीजन सिलिंडर लेने आते हैं, लेकिन उनकी क्षमता 25 से 30 सिलिंडर उपलब्ध करवाने की ही है। क्योंकि, ज्यादातर सिलिंडर अस्पतालों को सप्लाई हो रहे हैं। इसके अलावा कई व्यक्तियों ने लंबे समय से सिलिंडर वापस ही नहीं किया है। उन्होंने बताया कि यूज एंड थ्रो सिलिंडर आने के बाद उनका दबाव भी आधा हो गया है।

12 लीटर है सिलिंडर की क्षमता

डॉ. हेल्थ लैब्स फार्मा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एमके कौल ने बताया, इस सिलिंडर की खासियत यह है कि आकार छोटा होने के साथ ही इसका वजन बहुत कम है। जिसके चलते इसे कहीं भी आराम से ले जाया जा सकता है। एमके कौल ने बताया कि वह पिछले तीन साल से यूज एंड थ्रो ऑक्सीजन सिलिंडर बना रहे हैं। इस साल कोरोना संक्रमण के चलते इसकी मांग में जबरदस्त उछाल आया है। उनकी कंपनी के यूज एंड थ्रो ऑक्सीजन सिलिंडर की क्षमता 12 लीटर ड्राई ऑक्सीजन की है। वहीं, अन्य कंपनियों के इस सिलिंडर में पांच से आठ लीटर तक ऑक्सीजन आती है। कौल ने बताया कि 12 लीटर के सिलिंडर से 300 दफा इनहेल (सांस खींचना) किया जा सकता है। बिना रुके इस्तेमाल करने पर यह सिलिंडर छह से सात मिनट में ही खत्म हो सकता है, जबकि धीरे-धीरे इस्तेमाल करने पर इसे पूरा दिन चलाया जा सकता है। इस सिलिंडर को इस्तेमाल करने के लिए फ्लो मीटर लेने की जरूरत भी नहीं है।

यह भी पढ़ें-परिवार से पहले सेवा का फर्ज निभा रही हैं विनिता नेगी

Uttarakhand Flood Disaster: चमोली हादसे से संबंधित सभी सामग्री पढ़ने के लिए क्लिक करें