देहरादून, जेएनएन। कभी अपनी शुद्ध आबो-हवा के लिए पहचाना जाने वाला दून आज वायु प्रदूषण के मामले में देश के टॉप-10 शहरों में शुमार हो चुका है। इसकी बड़ी वजह है अंधाधुंध बढ़ती वाहनों की संख्या। इस सबके बीच अच्छी बात यह है कि दून की युवा पीढ़ी इसको लेकर बेहद गंभीर है। यह गंभीरता उनके शोध कार्यों में भी नजर आ रही है। दून की दूषित होती हवा ने ही छठी के छात्र अद्वैत क्षेत्री और ग्राफिक एरा के छात्र मधुर सक्सेना को प्रदूषण रहित वाहन बनाने के लिए प्रेरित किया। दोनों छात्रों की तकनीक को खूब प्रशंसा भी मिल रही है।

11 वर्ष की उम्र में अद्वैत ने बना दी हवा से चलने वाली बाइक

दून के बढ़ते वायु प्रदूषण ने 11 वर्षीय अद्वैत के बालमन पर गहरा प्रभाव डाला। यही वजह रही कि खेलने की उम्र में वह ऐसी बाइक बनाने में जुट गए, जो प्रदूषण की रोकथाम में सहायक साबित हो। उनका यह प्रयास सार्थक साबित हुआ और छोटी-सी उम्र में ही उन्होंने हवा से चलने वाली बाइक बना डाली। सेंट कबीर ऐकेडमी में कक्षा छह में पढ़ रहे अद्वैत ने इस बाइक का नाम अद्वैत-ओटू रखा है। उन्होंने यह बाइक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को समर्पित है।

ऐसे आया आइडिया

अद्वैत बताते हैं कि एक दिन वह गुब्बारे में हवा भर रहे थे। अचानक गुब्बारा हाथ से छूट गया और काफी ऊपर तक चला गया। यह देखकर अद्वैत के दिमाग में विचार आया कि जब हवा के दबाव से गुब्बारा उड़ सकता है तो बाइक क्यों नहीं चल सकती। इसके बाद वह अपने आइडिया को साकार करने में जुट गए। अद्वैत को यह यह बाइक बनाने में 13 माह लगे। अद्वैत ने बाइक में आगे की ओर दो टैंक लगाए हैं, जिनमें कंप्रेशर से हवा भरी जाती है। टैंकों के बीच छोटा-सा इंजन लगा है। टैंक में भरी हवा के दबाव से इंजन स्टार्ट होता है। 

कचरे में पड़े पेपर मैश से मधुर ने बनाई सी जीरो इलेक्ट्रिक कार

ग्राफिर एरा विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरि‍ंग की पढ़ाई कर रहे मधुर सक्सेना ने पेपर मैश से इलेक्ट्रिक कार बनाई है। मधुर ने बताया कि वह एनएसएस कार्यकर्ता हैं। एक दिन वह कॉलेज कैंपस में सफाई कर रहे थे। तभी उनकी नजर कूड़े के ढेर में पड़े पेपर मैश पर पड़ी। उसी पेपर से उन्होंने इलेक्ट्रिक कार बनाई है। कार का डिजाइन सितंबर 2019 में तैयार किया था।

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फ्रेबिकेशन और कार बनाने का कार्य अक्टूबर में शुरू किया। कार की बॉडी पेपर मैश से तैयार की गई है, जिसे बनाने में 15 दिन लगे। मधुर ने इस कार का नाम सी-जीरो रखा है, जिसका मतलब है कार्बन फुटप्रिंट जीरो। इसे बनाने का मुख्य उद्देश्य कार्बन के इस्तेमाल को कम करना है। गाड़ी की लंबाई 7.8 इंच और ऊंचाई 30 से 32 इंच है। मधुर ने बताया कि कार बनाने में उनकी टीम के 11 सदस्यों ने भी सहयोग किया। मधुर के इस प्रोजेक्ट को सर्कुलर इकोनॉमी अवार्ड भी मिल चुका है। इसमें उन्हें पुरस्कार के रूप में 2.5 लाख रुपये दिए गए थे।

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Posted By: Sunil Negi

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