देहरादून, राज्य ब्यूरो। भाजपा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सुब्रमण्यन स्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उत्तराखंड में चार धामों समेत 51 मंदिरों के लिए बनाए गए देवस्थानम बोर्ड कानून को वापस लेने की पैरवी की है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार का यह कदम भाजपा की नीति और हंदुत्व के दर्शन के खिलाफ है।

डॉ. सुब्रमण्यन स्वामी देवस्थानम बोर्ड कानून को नैनीताल हाईकोर्ट में चुनौती दे चुके हैं। प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में उन्होंने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार कानून बनाकर अधिकतर मंदिरों को नियंत्रण में ले चुकी है। मुख्यमंत्री खुद देवस्थानम बोर्ड के न्यासमंडल के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि उक्त कानून सुब्रमण्यन स्वामी बनाम तमिलनाडु सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट कहा है कि सरकार किसी भी मंदिर के प्रशासन को अपने नियंत्रण में नहीं ले सकती। सिर्फ मंदिर के फंड में अनियमितता के मामले में ही यह कदम उठाया जा सकता है। 
उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि इस मामले में हस्तक्षेप कर मुख्यमंत्री को उक्त कानून को वापस लेने के निर्देश दें। बताया कि उनकी ओर से इस कानून के खिलाफ याचिका पर हाईकोर्ट ने भी सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट कोई आदेश जारी करे, इससे बेहतर होगा कि उक्त कानून को वापस ले लिया जाए।
हाई कोर्ट ने सांसद सुब्रमण्यन स्वामी और सरकार से मांगा जवाब
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने चारधाम देवस्थानम बोर्ड के गठन को लेकर दायर जनहित याचिका में पक्षकार बनाने को लेकर दायर प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की। हाई कोर्ट ने अब याचिकाकर्ता सांसद सुब्रमण्यन स्वामी को जवाब पेश करने को कहा है। अगली सुनवाई के लिए 11 जून की तिथि नियत की है। इस मामले में अब तक सरकार ने जवाब दाखिल नहीं किया है। कोर्ट ने सरकार से भी 11 तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। 
गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ में देहरादून की रुरल लिटिगेशन एंड इनटाइटलमेंट (रूलक) संस्था के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई हुई। इसमें सांसद स्वामी की याचिका में पक्षकार बनाने की याचना की गई है। संस्था का कहना है कि सरकार द्वारा पारित चारधाम देवस्थानम एक्ट सही और जनहित में है। 

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