देहरादून, जेएनएन। उत्तराखंड में मौसम साफ रहा, लेकिन उच्च हिमालय में चोटियों पर हिमपात हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी मौसम का मिजाज ऐसा ही रहेगा। इधर, मंगलवार देर रात दून में तेज बारिश हुई। इससे तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई।

मंगलवार को मैदानी इलाकों में चटख धूप रही। इससे दोपहर में गरमी का एहसास करा रही है, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम सुहावना है। प्रदेश में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में वृद्धि हो रही है। इस बीच केदारनाथ पैदल मार्ग से बर्फ हटाने का काम जारी है, 80 श्रमिक मार्ग को दुरुस्त करने में जुटे हैं। प्रशासन का प्रयास है कि अप्रैल के पहले सप्ताह तक पैदल मार्ग आवाजाही के लायक बन जाए। राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार बुधवार को पहाड़ी जिलों उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग के साथ ही पिथौरागढ़ जिलों के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और बारिश हो सकती है।

विभिन्‍न शहरा में तापमान

  • शहर----------------अधिकतम----------- न्‍यूनतम
  • देहरादून---------------29.5----------------13.6
  • उत्‍तरकाशी-----------19.7---------------8.3
  • मसूरी---------------18.8---------------7.5 
  • टिहरी ---------------18.6---------------7.8
  • हरिद्वार---------------29.8--------------13.8
  • जोशीमठ---------------16.2--------------5.7
  • पिथौरागढ़---------------23.1---------------9.3
  • अल्‍मोड़ा--------------- 18.7---------------6.5
  • मुक्‍तेश्‍वर---------------20.2---------------5.7
  • नैनीताल---------------19.5---------------8.0
  • यूएसनगर---------------29.9------------12.5
  • चंपावत---------------18.3-------------7.2

मौसम के बाद अब कोरोना की भी मार

किसानों पर चौतरफा मार पड़ रही है। पहले मौसम की बेरुखी से गन्ना की बुआई नहीं हो पाई और अब पुराना गन्ना कोरोना के कारण खराब हो रहा है। लॉकडाउन के कारण शुगर मिलें बंद पड़ी हैं और किसानों की फसल पर संकट खड़ा हो गया है। कोरोना से दुनियाभर में कोहराम मचा हुआ है। लोगों में वायरस के संक्रमण का खौफ बना हुआ है। लेकिन, कोरोना ने किसानों की माली हालात भी बिगाड़ दी है। किसानों की गन्‍ने की फसल पर संकट मंडरा रहा है। एक ओर लॉकडाउन के कारण किसान खेतों में जाकर गन्‍ने की नई फसल की बुआई नहीं कर पा रहे हैं।

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वहीं, पुरानी फसल भी मिल तक नहीं पहुंच पा रही है। दरअसल, रायवाला, डोईवाला, सहसपुर और विकासनगर में तकरीबन साढ़े चार हजार हेक्टेयर भूमि में गन्‍ने की खेती की जाती है। इसमें भी करीब 65 फीसद भूमि पर गन्‍ने की बुआई वसंत में होती है। 15 फरवरी से 15 मार्च के बीच का समय गन्‍ने की बुआई के लिए मुफीद माना जाता है, लेकिन मार्च की शुरुआत से ही हो रही बारिश ने गन्ना किसानों का गणित बिगाड़ दिया।

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Posted By: Sunil Negi

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