उत्तराखंड में दूर होगा बिजली संकट, इन सात नए हाइड्रो प्रोजेक्ट से मिलेगी बड़ी राहत
उत्तराखंड सरकार पिथौरागढ़ की तीन नदी घाटियों में सात लघु जलविद्युत परियोजनाओं के माध्यम से 108.8 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की तैयारी कर रही है।

पिथौरागढ़ की तीन घाटियों में 108.8 मेगावाट क्षमता विकसित करने की तैयारी।

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राज्य ब्यूरो, देहरादून। बिजली की बढ़ती मांग और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए उत्तराखंड सरकार जलविद्युत उत्पादन क्षमता बढ़ाने जा रही है। पिथौरागढ़ की तीन नदी घाटियों में सात लघु जलविद्युत परियोजनाओं के माध्यम से 108.8 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की तैयारी है।
ऊर्जा उत्पादन बढ़ने से राज्य को बिजली की बढ़ती मांग पूरी करने में मदद मिलेगी और केंद्रीय पूल तथा बिजली बाजार से अतिरिक्त बिजली लेने की निर्भरता भी कम की जा सकेगी।
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कुल प्रस्तावित क्षमता 108.8 मेगावाट
उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) ईस्टर्न रामगंगा, गोरीगंगा और धौलीगंगा घाटियों में सातों लघु जलविद्युत परियोजनाओं को विकसित कराएगा। इनमें मुवानी (15 मेगावाट), कामतौली (14 मेगावाट), जिम्बामराम (21 मेगावाट), प्युंशानी (12 मेगावाट), बालगाड़ (19.8 मेगावाट), पैनागाड़ ए (12 मेगावाट) और मंडप (15 मेगावाट) की परियोजनाएं शामिल हैं।
इनकी कुल प्रस्तावित क्षमता 108.8 मेगावाट है। परियोजनाओं का विकास लघु जलविद्युत नीति के तहत 2 से 25 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं के लिए तय व्यवस्था के अनुसार निर्माण, स्वामित्व व संचालन के आधार पर किया जाएगा।
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‘नई परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर बिजली उपलब्धता बढ़ने के साथ मांग के समय ग्रिड पर दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी। परियोजनाओं के निर्माण से पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। सड़क और परिवहन जैसी स्थानीय सुविधाओं से जुड़ी गतिविधियां बढ़ेंगी। सरकार बड़े जलविद्युत प्रोजेक्टों के साथ पंप्ड स्टोरेज, बैटरी स्टोरेज और लघु जलविद्युत परियोजनाओं को आगे बढ़ाकर उत्पादन के साथ ऊर्जा भंडारण की क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रही है।’ - आर मीनाक्षी सुंदरम, प्रमुख सचिव ऊर्जा
