देहरादून, [राज्य ब्यूरो]: उत्तराखंड में अब मैंथा (मिंट) इंडस्ट्री को पंख लगने की उम्मीद जगी है। प्रदेश मंत्रिमंडल द्वारा मैंथा प्रजाति के उत्पादों पर लगने वाला ढाई फीसद मंडी शुल्क माफ करने को मंजूरी दिए जाने के बाद राज्य के किसानों को जहां बेहतर दाम मिल सकेंगे, वहीं उत्तराखंड से पलायन कर चुकी मिंट इकाइयां वापस लौटेंगी। साथ ही राज्य में नई इकाइयां भी स्थापित होंगी। 

उत्तराखंड में भी मिंट की खेती से काफी संख्या में किसान जुड़े हुए हैं। ऊधमसिंहनगर, हरिद्वार में सबसे अधिक मिंट की खेती होती है। असल में वर्ष 2014 से पहले मिंट पर मंडी टैक्स नहीं लगता था। ऐसे में यहां मिंट का कारोबार भी बेहतर था और कई इकाइयां स्थापित थीं। 

2014 से ढाई फीसद मंडी शुल्क लगने का असर ये रहा कि राज्य से बड़ी संख्या में मिंट इकाइयां उत्तर प्रदेश में पलायन कर गईं। उप्र में मिंट पर एक फीसद मंडी शुल्क लगता है। ऐसे में उत्तराखंड के किसानों को मिंट की बिक्री के लिए उप्र के बरेली, रामपुर समेत अन्य स्थानों की दौड़ लगानी पड़ रही थी। साथ ही किसानों को उचित दाम भी नहीं मिल पा रहा था।

इस सबको देखते हुए राज्य में मिंट पर मंडी शुल्क माफ करने की मांग लंबे समय से उठ रही थी। अब सरकार ने इसे माफ कर किसानों को बड़ी राहत दे दी है। जानकारों के मुताबिक अब बड़ी संख्या में क्रेता न सिर्फ उत्तराखंड का रुख करेंगे, बल्कि पूर्व में पलायन कर चुकी इकाइयां भी वापस लौटेंगी। ऐसे में किसानों को मिंट के उचित रेट मिल पाएंगे। जाहिर है कि इससे किसानों की आय दोगुना करने में मदद मिलने के साथ ही रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

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By Sunil Negi