रुड़की में नकली दवा फैक्टरी का भंडाफोड़: न फार्मेसिस्ट, न लैब एक्सपर्ट; 8-10वीं पास तैयार कर रहे थे दवाइयां
रुड़की में एसटीएफ ने एक नकली दवा फैक्टरी का भंडाफोड़ किया, जहां 8वीं-10वीं पास लोग बिना सुरक्षा उपकरणों के अस्वच्छ माहौल में दवाएं बना रहे थे।

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

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सोबन सिंह गुसांई, देहरादून। जिन ब्रांडेड दवाइयों को लोग अपनी जिंदगी बचाने का सहारा मानते हैं, उन्हीं दवाइयों के नाम पर तैयार हो रही नकली दवाओं की हकीकत सामने आने के बाद हर कोई सन्न है।
रुड़की क्षेत्र में एसटीएफ की ओर से पकड़ी गई नकली दवा फैक्ट्री की हालत देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोग किस तरह अनजाने में अपनी जान जोखिम में डाल रहे थे।
कर्मचारियों ने न ग्लव्स पहने थे, न मास्क
जांच में सामने आया कि जिन दवाइयों को मरीज डाक्टर की सलाह पर भरोसे के साथ खरीदते हैं, उन्हें बेहद गंदगी भरे स्थान पर तैयार किया जा रहा था। फैक्ट्री के बाहर सीवरेज का पानी बह रहा था। अंदर बिना किसी मेडिकल ट्रेनिंग वाले 8वीं व 10वीं पास युवक दवाइयां बना रहे थे। कर्मचारियों ने न ग्लव्स पहने थे, न मास्क और न ही कोई सुरक्षा उपकरण। ऐसे हालात में तैयार दवाओं की गुणवत्ता कैसी होगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।
सबसे खतरनाक बात यह है कि आरोपित कंपनियों की पैकिंग की हूबहू कापी तैयार कर रहे थे। आम ग्राहक के लिए असली और नकली दवा में फर्क करना लगभग नामुमकिन था। यही वजह है कि लोग सस्ते दाम और भारी डिस्काउंट के लालच में आनलाइन या बिना जांच-पड़ताल के दवाइयां खरीद रहे हैं और नकली दवाओं के जाल में फंस रहे हैं।
सस्ते केमिकल व घटिया सामग्री से तैयार हो रही थी ब्रांडेड दवाइयां
जांच में यह भी सामने आया कि फैक्ट्री में तैयार दवाइयों की कोई लैब टेस्टिंग या क्वालिटी जांच नहीं होती थी। सस्ते केमिकल और घटिया सामग्री से तैयार टैबलेट्स को ब्रांडेड दवाओं की पैकिंग में भरकर अलग-अलग राज्यों में सप्लाई किया जा रहा था। कई दवा विक्रेता भी इन्हें कम कीमत में खरीदकर बाजार में असली एमआरपी पर बेच रहे थे।
मुनाफे के चक्कर में केमिस्ट भी कर रहे खिलवाड़
मुनाफा कमाने के चक्कर में आमजन की जिंदगी से खिलवाड़ करने में केमिस्ट भी कहीं पीछे नहीं हैं। बताया जा रहा है कि 40 से 50 प्रतिशत कमीशन के लालच में कई केमिस्ट आनलाइन दवाइयां मंगाते हैं और यही दवाइयां पांच से 10 प्रतिशत कमीशन पर आम आदमी को बेची जाती हैं।
इन दवाइयों को मानिटरिंग करने वाला कोई नहीं है। एसटीएफ अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, सप्लाई चेन और आनलाइन खरीद-बिक्री के पूरे सिस्टम की जांच कर रही है। ड्रग विभाग भी फैक्ट्री से बरामद दवाइयों के सैंपल लैब जांच के लिए भेज रहा है।
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