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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 10, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

उत्तराखंड में रफ्तार नहीं पकड़ पा रहे सड़क और पुल निर्माण के कार्य, सवालों के घेरे में विभागीय कार्यशैली

By Raksha PanthriEdited By:
Published: Wed, 10 Nov 2021 01:10 PM (IST)

पुल और सड़क के निर्माण कार्य रफ्तार नहीं पकड़ पा रहे हैं। स्थिति यह है कि शासन से लेकर विभाग ...और पढ़ें

उत्तराखंड में रफ्तार नहीं पकड़ पा रहे सड़क और पुल निर्माण के कार्य।
उत्तराखंड में रफ्तार नहीं पकड़ पा रहे सड़क और पुल निर्माण के कार्य।

राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में पुल और सड़क के निर्माण कार्य रफ्तार नहीं पकड़ पा रहे हैं। स्थिति यह है कि शासन से लेकर विभाग स्तर तक बजट की स्वीकृति से लेकर निर्माण के कार्य धीमी गति से चल रहे हैं। शासन ने सितंबर तक स्वीकृत बजट के सापेक्ष केवल 50 प्रतिशत बजट जारी किया है। वहीं अवमुक्त बजट में से भी 50 प्रतिशत से कम खर्च हो पाया है। इसे लेकर विभागीय कार्यशैली सवालों के घेरे में है।

प्रदेश सरकार ने इस साल लोक निर्माण विभाग के लिए 2740 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। लोक निर्माण विभाग से सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में यह बताया गया है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में शासन ने स्वीकृत 2740 करोड़ के सापेक्ष 1392.42 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इनमें से 22 सितंबर तक 568.65 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। विभाग ने शासन से प्राप्त धनराशि में से केवल 40 प्रतिशत धनराशि खर्च की है। प्रदेश में राज्य सेक्टर से अभी नए मार्ग के तकरीबन 3843 कार्य चल रहे हैं।

इनमें 233.34 करोड़ रुपये के सापेक्ष 151.28 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। नए पुल बनाने व दुरुस्त करने के 189 कार्य हैं। इनके लिए 8.94 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत है। इसके सापेक्ष केवल 3.58 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। राज्य सेक्टर के लिए अवमुक्त 299.48 करोड़ में से अभी तक 169.64 करोड़ के कार्य ही हो पाए हैं। इसी प्रकार पूंजीगत मदों में स्वीकृत 560.30 करोड़ रुपये के कार्यों के सापेक्ष 262.14 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इन कार्यों की रफ्तार तेज करने को लेकर शासन स्तर से कई बार निर्देश दिए गए, लेकिन अभी तक इन पर अमल नहीं किया जा सका।

अब चुनाव में केवल तीन माह का समय शेष है। ऐसे में शासन स्तर से स्वीकृत बजट के सापेक्ष बजट अवमुक्त करना और अवमुक्त बजट के सापेक्ष धरातल पर कार्यों को उतारना लोक निर्माण विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती है। विभागीय मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि अधिकारियों को तेजी और पारदर्शिता के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि इसमें कहीं लापरवाही नजर आएगी तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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