यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 30, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
उत्तराखंड में गैंडों का संसार बसाने को केंद्र पर टिकी निगाहें, एनटीसीए व सीजेडए को भेजे हैं पत्र
उत्तराखंड सरकार ने पूर्व में कार्बेट टाइगर रिजर्व में गैंडों का संसार फिर से बसाने का निर्णय लिया था। अब ...और पढ़ें

राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में गैंडों का संसार फिर से बसाने के लिए अब निगाहें केंद्र पर टिक गई हैं। राज्य की ओर से इस सिलसिले में अनुमति के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) को पत्र भेजे गए हैं। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग के अनुसार केंद्र से हरी झंडी मिलने के बाद असोम व बंगाल से यहां गैंडे लाए जाएंगे।
एक दौर में राज्य में कार्बेट टाइगर रिजर्व में गैंडों की बसागत थी, लेकिन बाद में विभिन्न कारणों से ये यहां से विलुप्त हो गए। वन विभाग के अभिलेखों में बाकायदा इसका उल्लेख है। बताया गया कि पूर्व में दलदली क्षेत्र सिमटने, वासस्थल क्षेत्र में परिवर्तन और विकास व जंगल में सामंजस्य न होने के कारण ये सिमटते चले गए। इसे देखते हुए पूर्व में भारतीय वन्यजीव संस्थान ने कार्बेट में फिर से गैंडों को बसाने के मद्देनजर अध्ययन किया। बात सामने आई कि गैंडों के लिए परिस्थितियां अब मुफीद हुई हैं। कार्बेट नमभूमि क्षेत्र के संरक्षण को उठाए गए कदमों से यह स्थिति बनी है। वासस्थल भी ज्यादा बेहतर हुआ है।
इस सबके मद्देनजर संस्थान की ओर से गैंडों को यहां दोबारा बसाने का प्रस्ताव वन विभाग को भेजा गया, जिस पर राज्य वन्यजीव बोर्ड ने मुहर लगाई। इसके बाद यह प्रस्ताव राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड को अनुमोदन के लिए भेजा गया। बोर्ड ने राज्य को इस संबंध में एनटीसीए व सीजेडए से अनुमति लेने को कहा।
वजह ये कि टाइगर रिजर्व में किसी भी प्रकार की नई गतिविधि अथवा नए जानवर को लाने के लिए एनटीसीए व सीजेडए की अनुमति जरूरी है। इसके बाद वन विभाग की ओर से एनटीसीए को पत्र भेजा गया, जिस पर प्राधिकरण ने कुछ सुझाव दिए। राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक सुहाग के अनुसार एनटीसीए के सुझावों के अनुरूप प्रस्ताव में संशोधन करते हुए इसे एनटीसीए को भेजा जा चुका है। इसके साथ ही सीजेडए को भी पत्र भेजा गया है। उन्होंने कहा कि एनटीसीए व सीजेडए से अनुमति मिलने के बाद गैंडों को कार्बेट में लाने की कवायद शुरू की जाएगी। सुहाग ने बताया कि गैंडों को यहां लाने के संबंध में असोम और बंगाल के वन महकमों के आला अधिकारियों से बातचीत हो चुकी है। उम्मीद है कि चालू वित्तीय वर्ष में यह मुहिम धरातल पर उतर जाएगी।
