दो साल से मासूम संग दुष्कर्म और कुकर्म कर रहा था नाना, कोर्ट ने किया बरी; पुलिस पर उठे सवाल
देहरादून की एक अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म और कुकर्म के आरोपी रिश्तेदार (नाना) को साक्ष्य के अभाव में बरी ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, देहरादून। एक नाबालिग से दुष्कर्म और कुकर्म के आरोपी रिश्तेदार (दूर के रिश्ते में नाना) को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश(पॉक्सो) रजनी शुक्ला ने जारी फैसले में कहा है कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों को साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा है।
यह थे आरोप
मामला मई 2023 में विकास नगर थाने में दर्ज हुआ था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, विकासनगर निवासी एक व्यक्ति ने अपने दूर के रिश्तेदार (जो रिश्ते में पीड़िता का नाना लगता था) पर आरोप लगाया था कि वह पिछले दो सालों से उनकी नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म और कुकर्म कर रहा था। पुलिस ने आरोपी को 23 मई 2023 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
सुनवाई के दौरान तथ्यों में भी रहा विरोधाभास
अदालत ने बचाव पक्ष की इस दलील पर सहमति जताई कि मामला विरोधाभास से भरा है। अदालत ने कहा कि नाबालिग की जन्मतिथि को लेकर स्कूल के प्रवेश पत्र और टीसी में अलग-अलग तारीखें पाई गईं और रिकॉर्ड में ओवरराइटिंग भी देखी गई। अदालत ने माना कि अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि घटना के समय पीड़िता वास्तव में नाबालिग थी।
किशोरी ने अदालत को बताया कि उसने घटना के 10-12 दिन बाद अपनी मां को जानकारी दी। वहीं, उसके पिता ने दावा किया कि उन्होंने घटना वाले दिन ही उसे डॉक्टर को दिखाया था। समय का यह अंतर अभियोजन की कहानी पर सवाल खड़े करता है।
पुलिस पर उठे सवाल
अदालत ने कहा कि आरोपी पर दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप थे, लेकिन पुलिस ने मामले की विवेचना के दौरान डीएनए परीक्षण के लिए कोई साक्ष्य संकलित नहीं किए, जो कि ऐसे मामलों में एक अहम कड़ी होती है। दूसरी ओर जिरह के दौरान पीड़िता ने स्वीकार किया कि उसके परिवार और आरोपी के बीच झगड़े रहते थे।
