देहरादून, [जेएनएन]: मौसम के शुष्क बने रहने से परेशान काश्तकारों ने दो दिन हुई बारिश-बर्फबारी से कुछ राहत महसूस की है। कारण यह है कि  फसलों के लिए बारिश और बर्फबारी संजीवनी साबित होगी।  

बारिश और बर्फबारी में नवंबर से दिसंबर तक 66 फीसद और जनवरी से अब तक 73 फीसद की कमी रही। इससे सेब और गेहूं की फसल पर संकट के बादल छाए थे। 

दरअसल, सेब की अच्छी फसल के लिए एक हजार से 1400 घंटे का चिलिंग प्वाइंट जरूरी होता है। इसमें तापमान छह डिग्री सेल्सियस से कम होना चाहिए। बर्फ पढ़ने के बाद ही ऐसा संभव होता है। 

मुख्य उद्यान अधिकारी एसके श्रीवास्तव ने बताया कि दिसंबर से फरवरी तक सेब, अखरोट, बादाम, नाशपाती, आडू आदि के पौधों का रोपण होता है। यह बारिश इसके लिए बहुत फायदेमंद है। 

वहीं, मौसम का मिजाज पर्वतीय क्षेत्रों में गेहूं की फसल को नुकसान पहुंच रहा था। क्योंकि, मैदान में सिंचाई ट्यूबवैल के माध्यम से होती है, लेकिन पहाड़ में सिंचाई सिर्फ बारिश पर निर्भर है। मुख्य कृषि अधिकारी विजय देवराड़ी ने बताया कि इस वक्त गेहूं की फसल को बारिश की सख्त जरूरत थी। कम बारिश के कारण गेहूं के साथ चना, मसूर की फसल को भी नुकसान पहुंच रहा था। बारिश होने से अब कुछ राहत मिली है।  

आम, अमरूद, लीची के लिए भी मुफीद 

मुख्य उद्यान अधिकारी एसके श्रीवास्तव ने बताया कि यह वक्त आम, अमरूद, लीची की फ्लॉवङ्क्षरग शुरू होती है। बारिश के चलते नमी रहेगी तो फ्लॉवरिंग तो अच्छी होगी ही साथ ही फल की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। रोग लगने की आशंका भी कम रहेगी।

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Posted By: Bhanu