देहरादून, जेएनएन। जीवन में कई ऐसी घटनाएं होती हैं जो इंसानियत पर हमारा भरोसा कायम रखती हैं। यह साबित करती हैं कि अभी दुनिया अच्छे और सच्चे लोगों से खाली नहीं हुई है। रविवार को दून में भी ऐसे दो मामले सामने आए, जिन्होंने यह साबित किया कि इंसानियत जिंदा है। 

बच्चे को मां से मिलवाया 
पहला वाकया दून अस्पताल से जुड़ा है। अस्पताल के गार्ड ने सामाजिक संस्था छोटी सी दुनिया को फोन किया। गार्ड ने बताया कि अस्पताल परिसर से एक लावारिस बच्चा मिला है। जिसकी उम्र करीब नौ से दस साल है। वह काफी घबराया हुआ है और कुछ बता नहीं पा रहा। संस्था के सदस्य विजय राज के बहुत देर तक पूछने पर बच्चे ने अपना नाम राकेश, पिता का नाम धर्म राज और मां का नाम नीतू बताया। घर का पता पूछने पर कहा कि वह भूल गया है। घर का रास्ता पूछने पर बताया कि उसे थोड़ा-थोड़ा याद है। 
इसपर संस्था के सदस्य उसे बाइक पर बैठाकर रास्ता पूछते-पूछते बल्लूपुर पहुंचे। जिसके बाद बच्चा कुछ नहीं बता पाया। काफी देर इधर-उधर पूछने पर कुछ बच्चे मिले जो उसे पहचानते थे। उनमें एक बच्चे के साथ संस्था के सदस्य उसके घर पहुंचे और बच्चा मां के सुपुर्द किया। 
असहाय के लिए सहाय बने सुमित 
दूसरा मामला कोरोनेशन अस्पताल का है। रोटी बैंक के संचालक सुमित रोजमर्रा की तरह सुबह चार बजे अस्पताल पहुंचे थे। पता चला कि पिछले कई दिनों से अस्पताल में भर्ती सात वर्षीय करण की मौत हो गई है। उसके असहाय और दिव्यांग पिता पैसे न होने के कारण उसका शव तक अपने मूल निवास सितारगंज नहीं ले जा पा रहे हैं। जिस पर सुमित ने अपने पास से 5100 रुपये की मदद की। साथ ही कोरोनेशन और फोर्टीस अस्पताल में तमाम लोगों से पैसे इकट्ठा किए। उस परिवार के लिए 14 हजार रुपये की मदद जुटाई। सुमित का कहना है कि वह अब इस तरह के लोगों के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था भी करेंगे। जिसमें तीमारदारों को सिर्फ ईंधन के पैसे देने होंगे।