देहरादून, जेएनएन। द्रोणनगरी में लोगों ने श्रद्धा और उल्लास के साथ घर में ही हनुमान जयंती मनाई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने हनुमान चालीसा के साथ सुंदरकांड का भी पाठ किया। राजधानी के तमाम मंदिरों और आश्रमों में भी शांतिपूर्वक बजरंगबली का जन्मदिवस मनाया गया। इस मौके पर कई लोगों ने मंदिरों में ऑनलाइन पवनसुत का पूजन कराया।

लॉकडाउन के चलते इन दिनों शहरभर के मंदिरों के कपाट बंद हैं। ऐसे में हनुमान जयंती पर लोगों ने घर में ही बजरंगबली की पूजा-अर्चना की। इस दौरान लोगों ने हनुमान जी से देश-दुनिया से कोरोना वायरस का संकट खत्म करने को विशेष प्रार्थना की। टपकेश्वर महादेव मंदिर के महंत कृष्णा गिरी महाराज ने बताया कि उन्होंने अपने निवास पलटन बाजार स्थित जंगम शिवालय में ही पूजा की।

मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद रहे। ज्योतिषाचार्य डॉ. सुशांत राज ने बताया कि हनुमान जयंती पर उत्तराखंड समेत दूसरे राज्यों से भी भक्तों ने फोन कर विशेष पूजा कराई। श्रीआदर्श मंदिर पटेलनगर में सुबह शुभ मुहूर्त में विशेष पूजा कर हनुमान जी को तेल व सिंदूर का लेप लगाकर नया चोला अर्पित किया गया। मंदिर समिति के अध्यक्ष अरुण कुमार शर्मा ने बताया कि हनुमान जी को पांच किलो के लड्डू का भोग लगाकर जगत के कल्याण व कोरोना से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की गई।

शाम को मंदिर समिति के सदस्यों ने सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए 108 दीप जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ किया। हिन्दू युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद वाधवा ने बताया कि 25 मार्च से आठ अप्रैल तक संगठन के सभी सदस्यों ने घर पर ही परिवार के साथ हनुमान चालीसा का पाठ किया।

हनुमान जयंती पर घर-घर घूमा बंदर

हनुमान जयंती के अवसर पर जौनसार के दौधा व गबेला गांव में मंदिर के चारों ओर चक्कर लगाने वाला बंदर लोगों के बीच कौतुहल का विषय बना रहा। बताया जा रहा गांव में अचानक आए इस बंदर ने सभी ग्रामीण परिवारों के घर की छत पर चक्कर लगाया और बाद में मंदिर के शिखर की चोटी पर बैठ गया। लोगों ने बंदर को देवदूत मानकर उसकी पूजा-अर्चना कर भगवान से खुशहाली की कामना की।

जानकारी के अनुसार, चकराता ब्लॉक के सुदूरवर्ती दौधा व गबेला गांव में एक बंदर अचानक देखा गया। दौधा पंचायत के प्रधान रणवीर शर्मा ने कहा कि हनुमान जयंती के अवसर पर एक बंदर गांव में आया और सबसे पहले गबेला के कुकुर्सी महाराज मंदिर के चारों तरफ चक्कर लगाने के बाद मंदिर के शिखर की चोटी पर बैठ गया। जहां से वह काफी देर तक पूरे गांव को निहारता रहा। 

इसके बाद बंदर पास के दौधा गांव में आया और यहां शिरगुल महाराज मंदिर के चारों ओर चक्कर लगाने के बाद पहले मंदिर के शिखर पर बैठा। उसके बाद गांव में करीब 60 लोगों के घरों की छत के ऊपर चक्कर लगाने के बाद मंदिर के पुजारी दलीप शर्मा के घर की छत पर बैठ गया। ग्राम प्रधान ने कहा दोपहर करीब डेढ़ बजे से पुजारी के घर की छत पर बैठे बंदर को शाम पांच बजे तक देखा गया। इस दौरान लोगों ने बंदर को खाने के लिए मक्की व गुड़ दिया, लेकिन बंदर ने मक्की को छोड़कर सिर्फ गुड़ खाया।

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गांव में पहली बार इस तरह की घटना देख सभी हैरत में पड़ गए। लोगों ने हनुमान जयंती पर गांव व मंदिर का चक्कर लगाने आए बंदर को देवदूत मानकर उसकी पूजा-अर्चना शुरू कर दिए। लोगों ने समूचे क्षेत्र व देशवासियों की खुशहाली की कामना भी की। इस दौरान गांव स्याणा एवं बजीर केशव शर्मा, स्याणा सरदार सिंह, पुजारी दलीप शर्मा आदि मौजूद रहे।

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