देहरादून, जेएनएन। पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहे देशभर के राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) कर्मचारी एक अक्टूबर को काला दिवस मनाकर विरोध जताएंगे। इस दौरान कर्मचारी काली पट्टी और काला मास्क लगाएंगे। साथ ही सोशल मीडिया पर काली तस्वीर अपलोड करेंगे। गुरुवार को राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा की प्रदेश कोर कमेटी की ऑनलाइन बैठक आयोजित हुई। जिसमें निर्णय लिया गया कि आगामी एक अक्टूबर को काला दिवस मनाकर सरकार का विरोध किया जाएगा।

पदाधिकारियों ने कि एक अक्टूबर 2005 के दिन ही राज्य के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन की सुविधा से वंचित कर दिया था। इसी के विरोध में कार्मिकों ने इस दिन को काले दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इस दिन कर्मचारी काली पट्टी या काला मास्क पहनकर विरोध जताएंगे। अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट पर काली तस्वीर लगाएंगे। साथ ही रात आठ बजे से नौ बजे के बीच अपने घरों पर लाइट बंद रखेंगे। मोर्चा के प्रदेश महासचिव सीताराम पोखरियाल ने कहा कि कर्मचारी सरकार के साथ प्रत्येक निर्णय पर कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। अपने जीवन के स्वर्णिम वर्ष वह देश के विकास में योगदान करते हुए बिताता है। देश को आयकर से लेकर आपदा में प्रत्येक स्थिति में समर्थन देता है। लेकिन, उसकी सेवानिवृति के बाद आज कर्मचारी आर्थिक संकट से जूझ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश को आत्मनिर्भरता का नारा दिया, लेकिन, बुढापे में जब हाथ-पैर किसी काम के न हों और जेब खाली हो तो किस प्रकार आत्मनिर्भरता के उद्देश्य को पूर्ण किया जाए।प्रदेश अध्यक्ष अनिल बडोनी ने कहा कि देश में कोरोना की महामारी से कई कर्मचारी अपनी जान गंवा रहे हैं और सरकार के पास उसके आंकड़े तक नहीं। देश में निजी व सार्वजनिक क्षेत्र मिलाकर चार करोड़ से ज्यादा एनपीएस कार्मिक हैं, जिनमें से महज 66 लाख ही सार्वजनिक क्षेत्र से हैं।

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ये मांग सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों की है, जिनमें, कर्मचारी, शिक्षक, रेलवे, पैरामिलिट्री के सेवक शामिल हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें 1000 रुपये से भी कम मासिक पेंशन प्राप्त हो रही है। मांग की कि कार्मिकों को उनका हक़ देकर पुरानी पेंशन को लागू किया जाए। इस बैठक में देवेंद्र बिष्ट, प्रवीण भट्ट, योगिता पंत, कपिल पांडे, जयदीप रावत, नरेश भट्ट, सौरभ नौटियाल, कमलेश मिश्रा, राजेंद्र शर्मा, सुबोध कांडपाल आदि शामिल हुए।यह भी पढ़ें: Containment Zones: देहरादून में 10 कंटेनमेंट जोन हुए समाप्त, चार नए बने; अब जिले में रह गए इतने कंटेनमेंट जोन

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