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मेडिकल दाखिलों में फर्जीवाड़े की आशंका, पुराने प्रवेश भी जांच के दायरे में

Published: Mon, 21 Sep 2026 11:33 PM (IST)

नीट यूजी काउंसलिंग में प्रमाणपत्रों के संदिग्ध इस्तेमाल के बाद अब पिछले वर्षों के मेडिकल दाखिलों की भी जांच की ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई से बनाई गई है

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राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। नीट यूजी काउंसलिंग में प्रमाणपत्रों के संदिग्ध इस्तेमाल का मामला सामने आने के बाद अब जांच की नजर केवल इस साल के दाखिलों तक सीमित नहीं। शासन स्तर पर यह पड़ताल भी की जा रही है कि क्या पिछले वर्षों में भी किसी अभ्यर्थी ने फर्जी या नियम विरुद्ध प्रमाणपत्र के आधार पर मेडिकल सीट हासिल की।

ऐसे में पुराने दाखिलों के रिकार्ड और उनमें लगाए गए प्रमाणपत्र भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। नीट यूज- 2026 की काउंसलिंग में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित समेत अन्य श्रेणियों के प्रमाणपत्रों के संदिग्ध इस्तेमाल के मामले सामने आए हैं।

कई प्रमाणपत्र निरस्त किए जा चुके हैं और संबंधित दाखिलों की भी जांच हो रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जांच का दायरा सभी आरक्षित श्रेणियों तक बढ़ाया गया है।

अब शासन यह मिलान भी करने की तैयारी में है कि क्या पिछले वर्षों में राज्य कोटे अथवा आरक्षित और विशेष उपश्रेणियों का लाभ लेकर मेडिकल सीट पाने वाले अभ्यर्थी वास्तव में पात्र थे या नहीं।

इसमें निवास, जाति, ईडब्ल्यूएस, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित समेत उन सभी प्रमाणपत्रों की जांच होगी, जिनके आधार पर सामान्य मेरिट से अलग लाभ मिला। पिछले वर्षों में ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों की जांच का मामला भी उठा था।

भाजपा नेता रविंद्र जुगरान की शिकायत के बाद चिकित्सा शिक्षा निदेशक डा. आशुतोष सयाना ने सभी मेडिकल कालेजों के प्राचार्यों को पिछले तीन वर्षों की नीट-पीजी काउंसलिंग और भर्ती प्रक्रिया में इस्तेमाल हुए ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों की पड़ताल के निर्देश दिए थे।

इसमें यह सुनिश्चित करने को कहा गया था कि ईडब्ल्यूएस का लाभ केवल पात्र अभ्यर्थियों को ही मिला हो। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कुछ अभ्यर्थियों ने परिवार की वास्तविक आय छिपाकर ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र हासिल किए।

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प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया और संपत्ति संबंधी सत्यापन पर भी सवाल उठाए गए थे। अब मौजूदा प्रकरण ने प्रमाणपत्र जारी करने से लेकर काउंसलिंग में सत्यापन तक पूरी व्यवस्था की जांच का रास्ता खोल दिया है।

यदि पुराने रिकार्ड में भी अपात्र अभ्यर्थियों को लाभ मिलने की पुष्टि होती है तो कार्रवाई का दायरा वर्तमान काउंसलिंग से आगे बढ़ सकता है।

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