नाना ने ऋषिकेश में की थी गंगा आरती, कहा था- 'असली गहना भीतर'... आज दमदार आवाज बन गई याद
नाना पाटेकर के निधन के बाद उनकी ऋषिकेश यात्रा और गंगा आरती में कही बातें फिर से याद की जा ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अंकुर अग्रवाल, देहरादून। देवभूमि में गंगा के किनारे खड़े होकर वह अभिनेता नहीं, भीतर झांकता हुआ एक इंसान था। सामने जलती आरती की लौ थी, पीछे ऋषिकेश की पहाड़ियां और सामने बह रही थी गंगा।
हिंदी सिनेमा में अपनी दमदार आवाज और धारदार संवादों से पहचान बनाने वाले नाना पाटेकर उस शाम कुछ अलग ही बात कर रहे थे। “जीवन में अच्छे कपड़े और दिखावा करने से कुछ नहीं होने वाला। हमारे अंदर जो है, वही हमारा वास्तविक गहना है।”
29 सितंबर 2022 को परमार्थ निकेतन में गंगा आरती में शामिल होने के बाद नाना ने यह बात कही थी। उन्होंने यह भी कहा था कि गंगा आरती में शामिल होकर उन्हें अपने अंदर बदलाव महसूस हो रहा है।
गुरुवार सुबह 75 वर्ष की उम्र में नाना पाटेकर के निधन की खबर आई तो ऋषिकेश की वह शाम उनकी उत्तराखंड से जुड़ी सबसे यादगार स्मृतियों में फिर जीवित हो उठी। गोवा स्थित उनके घर में कार्डियक अरेस्ट के बाद उनका निधन हुआ।
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आरती की लौ के सामने उतरा था स्टारडम
नाना पाटेकर उत्तराखंड मराठी फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में आए थे। चमोली की नीती घाटी से लेकर देहरादून और ऋषिकेश तक उनका प्रवास रहा। लेकिन इस यात्रा की सबसे अलग तस्वीर कैमरे के सामने नहीं, गंगा के किनारे बनी।

परमार्थ निकेतन में शाम की आरती के दौरान वह श्रद्धालुओं के बीच बैठे। न कोई फिल्मी संवाद, न कैमरों के सामने अभिनय। गंगा की धारा के सामने कुछ देर के लिए उनका दशकों का स्टारडम जैसे पीछे छूट गया। बातचीत में उन्होंने बाहरी चमक-दमक के बजाय भीतर की सच्चाई को महत्व दिया। उनके शब्द थे कि अच्छे कपड़े और दिखावे से कुछ हासिल नहीं होता, असली गहना वही है जो हमारे भीतर है।
“अपने अंदर बदलाव महसूस कर रहा हूं...”
नाना की इस यात्रा में यह टिप्पणी महज औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं थी। उन्होंने साफ कहा था कि गंगा आरती में शामिल होने के बाद वह अपने अंदर बदलाव महसूस कर रहे हैं। यही बात उनके उत्तराखंड प्रवास को बाकी फिल्मी यात्राओं से अलग करती है।
जिस अभिनेता ने पर्दे पर व्यवस्था, अन्याय, हिंसा और समाज की विसंगतियों के खिलाफ किरदार निभाए, वही अभिनेता गंगा के किनारे खड़े होकर बाहर की दुनिया बदलने से पहले भीतर देखने की बात कर रहा था।
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शायद यही वजह है कि नाना पाटेकर की ऋषिकेश यात्रा की तस्वीर आज भी सिर्फ एक अभिनेता के उत्तराखंड आने की तस्वीर नहीं लगती। वह उस कलाकार की तस्वीर लगती है, जो जिंदगी के अंतिम पड़ावों में भी अपने भीतर के आदमी को तलाशता रहा।
उत्तराखंड उन्हें सिर्फ शूटिंग के लिए नहीं खींचता था
गंगा आरती के बाद नाना का उत्तराखंड से जुड़ाव और गहरा हुआ। जोशीमठ और नीती घाटी में फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्होंने पहाड़ की सादगी को करीब से देखा। स्थानीय लोगों से मिले, सेना के जवानों से बातचीत की और यहां तक कहा कि वह उत्तराखंड में घर बनाकर रहना चाहते हैं।
देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात के दौरान भी उन्होंने उत्तराखंड के लोगों की तारीफ की थी। लेकिन उनकी उत्तराखंड स्मृति में सबसे ज्यादा देर तक शायद गंगा आरती की वह लौ ही जलेगी, जिसके सामने उन्होंने कहा था कि असली गहना बाहर नहीं, भीतर होता है। आज नाना पाटेकर नहीं हैं।
उनकी आवाज पर्दे पर सुनाई देती रहेगी, उनके संवाद याद किए जाते रहेंगे। मगर ऋषिकेश में गंगा की धारा के किनारे कही उनकी वह बात अब कुछ और अर्थ ले चुकी है, जिसे वह असली गहना कहते थे, वही उनकी सबसे बड़ी विरासत बनकर रह गया।
