खतरे में मसूरी की कैरिंग कैपेसिटी: 25 साल पहले आईएएस अकेडमी की रिपोर्ट में दी थी चेतावनी... सुझाए थे 19 उपाय
मसूरी की पर्यावरणीय स्थिति और अनियंत्रित निर्माण पर चिंता जताते हुए, सिटिजन्स फॉर ग्रीन दून और अनूप नौटियाल ने सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की है।

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जागरण संवाददाता, देहरादून। पहाड़ों की रानी मसूरी की पर्यावरणीय स्थिति और अनियंत्रित निर्माण पर चिंता जताते हुए सिटिजन्स फॉर ग्रीन दून और अनूप नौटियाल ने सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
उन्होंने सितंबर 2026 में उत्तराखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर मसूरी की वहन क्षमता के अनुरूप विकास कराने और अस्थिर परियोजनाओं पर रोक लगाने की मांग की है।
मसूरी की भौतिक सीमाएं पूरी होने की चेतावनी
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, वर्ष 2001 की लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी की रिपोर्ट में मसूरी की भौतिक सीमाएं पूरी होने की चेतावनी दी गई थी।
वर्ष 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यटकों की संख्या 2000 में 8.5 लाख से बढ़कर 2019 में 30.23 लाख हो गई। शहर में केवल 1240 निर्धारित पार्किंग स्थल हैं, जबकि लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र भूस्खलन और जमीन धंसने के मध्यम से उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में आता है।
19 सुधारात्मक उपाय
रिपोर्ट में जल संकट, घटते जलस्रोत, कचरा निस्तारण, सीवेज और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी भी उजागर की गई थी। इसमें 19 सुधारात्मक उपाय सुझाए गए थे।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इन सिफारिशों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव के समक्ष सुझाव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब याचिकाकर्ता मुख्य सचिव से मिलकर मसूरी की वहन क्षमता के अनुरूप विकास सुनिश्चित करने की मांग करेंगे।
