देहरादून, जेएनएन। हिमालय के चिंतक एवं आराधक डॉ. नित्यानंद को श्रद्धांजलि देते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य एवं वरिष्ठ प्रचारक अशोक बेरी ने कहा कि सिर्फ सरकारी योजनाओं से पलायन थमने वाला नहीं है। इसके लिए हमें मिलकर पहाड़ के हर गांव को तीर्थ बनाना होगा। साथ ही हर पल अपने गांव के विकास को लेकर चिंतन व मनन करना होगा। तभी पलायन रुक सकता है।

रविवार को सर्वे चौक के समीप स्थित पंडित नैनसिंह रावत सभागार में हिमालय को जीवन समर्पित करने वाले डॉ. नित्यानंद की जयंती पर उन्हें याद किया गया। अशोक बेरी ने डॉ. नित्यानंद के साथ बिताए समय को याद करते हुए कहा कि उनकी प्रेरणा से ही उत्तराखंड का निर्माण साकार हुआ। वह महान तपस्वी थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रांत कार्यवाह रहे डॉ. नित्यानंद ने अपने लेखों से इस ओर इशारा कर दिया था कि भारत माता का दिव्य भाल हिमालय जन शून्यता की ओर जा रहा है। यह राष्ट्रीय चिंता का विषय है। 

राज्य बनने के बाद भी उत्तराखंड में पलायन में कोई कमी नहीं देखी गई। सरकार के लिए पलायन रोक पाना संभव भी नहीं है। पलायन रोकने के लिए पहाड़ के लोगों को खुद पहल करनी होगी। मेरे गांव से पलायन कैसे रुके, इसपर विचार करने की जरूरत है। उन्होंने विभाजन व अकाल के समय का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय देश किन विकट परिस्थितियों से जूझा, यह जानकारी हमें अपने पूर्वजों से मिली। लेकिन, भावी पीढ़ी को इसका ज्ञान नहीं है। वह आराम की जिंदगी की आदी होती जा रही है। 

इस मौके पर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, चारधाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष शिव प्रसाद ममगाईं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रमुख सुरेश सुयाल, पर्वतारोही एवं पर्यावरणविद् हर्षवंती बिष्ट, उत्तरांचल उत्थान परिषद के संरक्षक डॉ. माधव मैठाणी, परिषद के अध्यक्ष प्रेम बड़ाकोटी, उपाध्यक्ष डॉ. आनंद सिंह रावत, महासचिव राम प्रकाश पैन्यूली, स्कॉलर्स होम स्कूल के डीन द्रोण खन्ना, श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेज के निदेशक सुभाष चंद कुलश्रेष्ठ आदि मौजूद रहे।

महापुरुषों के आचरण को अपनाता है समाज

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रसिद्ध नेत्र सृजन डॉ. राजेश तिवारी ने कहा कि जैसा आचरण महापुरुष करते हैं, वैसा ही आचरण समाज करता है। डॉ. नित्यानंद ने समाज को उत्थान की जो सीख दी। हमें उससे प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 1976 में आपातकाल के दौरान जब मैंने 12वीं पास की तो उस समय डीबीएस में प्रवेश लेने के दौरान हर ओर चर्चा होती थी कि डीबीएस के भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. नित्यानंद जेल में बंद हैं और उन्हें तरह-तरह की यातनाएं दी जा रही हैं। बाल्यकाल होने के कारण मेरा मन काफी घबराया और डॉ. नित्यानंद के दर्शनों के लिए लालायित भी हुआ। काफी समय बाद मेरठ मेडिकल कार्यालय में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अभ्यास वर्ग में डॉ. नित्यानंद से मुलाकात हुई। मेरा पूरा जीवन डॉ. नित्यानंद के हिमालय प्रेम से प्रभावित रहा।

22 करोड़ की लागत से बन रहा संस्थान

दून विश्वविद्यालय परिसर में निर्माणाधीन डॉ. नित्यानंद हिमालयी शोध संस्थान व अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. डीडी चौनियाल ने बताया कि उत्तराखंड के शैक्षिक पाठ्यक्रम में डॉ. नित्यानंद के विचार और शोध को शामिल किया गया है। इस संस्थान का निर्माण 22 करोड़ की लागत से हो रहा है। विवि में भूगोल व भूगर्भ के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम और शोध कार्य संचालित किए जा रहे हैं। यह संस्थान डॉ. नित्यानंद के हिमालय पर किए गए चिंतन व शोध को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है। दैनिक जागरण के राज्य संपादक कुशल कोठियाल ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. नित्यानंद की ओर से लिखे गए लेख 'ऐतिहासिक परिदृश्य एवं विकास के आयाम' के बिंदुओं को प्रदेश की राजनैतिक पार्टियां अपने नीतिगत दस्तावेज या घोषणा पत्र का हिस्सा बना सकती हैं।

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तीन विभूतियों को किया गया सम्मानित

उत्तरांचल उत्थान परिषद ने डॉ. नित्यानंद की जयंती पर मैती आंदोलन के प्रणेता पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, अल्मोड़ा के शल्ट निवासी शिक्षक सुरेंद्र सिंह चौहान और मनेरी भाली में सेवा आश्रम के समन्वयक चतर सिंह को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।

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Posted By: Sunil Negi

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