सोबन सिंह गुसांई, देहरादून। नशे के दलदल में फंसने वाले व्यक्ति की जिंदगी में कोई न कोई कारण ऐसा रहा होता है कि वह इस रास्ते पर इतनी दूर पहुंच जाता है कि उसका वापस लौटना बहुत मुश्किल होता है। ऐसी ही कहानी उन चार युवतियों की हैं, जिन्होंने तनाव में नशा शुरू किया और वाक एंड विन सोवर लिविंग होम तक तक पहुंच गईं।

कैंट क्षेत्र निवासी 22 वर्षीय युवती के घर में मां-बाप के बीच अक्सर झगड़ा होता था। इसके कारण युवती के माता-पिता अलग-अलग हो गए। इसके बाद भी पिता, युवती व उसकी मां के साथ बदसलूकी करता था। इससे वह इतनी तनाव में आ गई कि उसने स्मैक लेना शुरू कर दिया। नशे के दलदल में वह इतनी डूब गई कि मां ने उसे नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करवाया, लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिस केंद्र में वह बेटी को सुधारने के लिए भेज रही हैं, वहां स्थिति और खराब होगी।

यही कहानी दुष्कर्म की शिकार हुई 26 साल की युवती की है। वह गरीब परिवार से है। मां बीमार रहती हैं। घर के खराब होते हालात उसे तनाव की ओर ले गए और 12वीं के बाद स्कूल जाने के बजाय, उसने स्मैक लेना शुरू कर दिया। बेटी को हाथ से निकलता देख मां ने उसे केंद्र में भेज दिया।

रुड़की निवासी 19 वर्षीय युवती के पिता की कुछ माह पहले मौत हो गई। घर में एक छोटी बहन है, जो बोल नहीं पाती। घर की स्थिति के कारण वह पढ़ाई नहीं कर पाई और उसने स्मैक लेना शुरू कर दिया। मां ने किसी तरह कुछ पैसे जोड़कर बेटी को नशा मुक्ति केंद्र भेजा, लेकिन वहां के हालात और खराब थे।

विकासनगर निवासी 22 वर्षीय युवती के परिवार की स्थिति भी कुछ ठीक नहीं है। कुछ युवकों के संपर्क में रहकर उसे नशे की लत लग गई।

सत्यापन का चलेगा अभियान

एसएसपी डा योगेंद्र सिंह रावत ने बताया कि जिले में चल रहे केंद्रों की लिस्ट तैयार की जाएगी। सोमवार से नशा मुक्ति केंद्रों का सत्यापन अभियान शुरू किया जा रहा है। हर केंद्र का निरीक्षण कर देखा जाएगा कि वहां पर क्या गतिविधि चल रही हैं।

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Edited By: Raksha Panthri