देहरादून, राज्य ब्यूरो। उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड ने राज्य के 11 पर्वतीय जिलों के 38 विकासखंडों में बंजर और खाली पड़ी भूमि पर चाय बागान विकसित करने को 6238 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की है। वर्तमान में 1319 हेक्टेयर भूमि में लगे चाय बागानों से 3385 किसान जुड़े हैं। शेष भूमि में भी जल्द चाय बागान अस्तित्व में आएं, इसके लिए गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं। इनसे करीब 12 हजार किसान लाभान्वित होंगे। 

कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने विधायक धन सिंह नेगी के सवाल पर सदन को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में पुराने चाय बागानों के लिए 16.50 लाख पौध छह नर्सरियों में तैयार की जाएगी। मांग ज्यादा और उत्पादन कम प्रदेश में आलू बीज का उत्पादन कम है और मांग ज्यादा। विधायक प्रीतम सिंह पंवार के प्रश्न का जवाब देते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि इस वर्ष प्रदेश में 5256 मी.टन आलू बीज का वितरण किया गया। इसमें राज्य में उत्पादित बीज की मात्रा 2045 मी. टन थी। शेष बीज की व्यवस्था बाहर से मंगाकर की गई। 

नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के अनुपूरक प्रश्न पर मंत्री ने कहा कि आलू बीज उत्पादन को बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। विधायक पंवार के अनुपूरक प्रश्न पर उन्होंने कहा कि आलू पर रोग के चलते धनोल्टी आलू प्रक्षेत्र में दिक्कतें आई हैं। वहां 6.40 हेक्टेयर में बीजोत्पादन शुरू किया गया है। पीकेवीवाई में कम मिला बजट कृषि मंत्री ने विधायक देशराज कर्णवाल के प्रश्न पर बताया कि इस वर्ष प्रधानमंत्री कृषि विकास योजना में राज्य को 38 करोड़ का बजट मिला। यह गत वर्ष 43 करोड़ था। उन्होंने रुद्रपुर स्थित बहुद्देश्यीय हाल को किसानों को उपलब्ध कराने की बात भी कही। 

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8.81 लाख किसानों को मृदा हेल्थ कार्ड 

विधायक प्रीतम सिंह के प्रश्न पर कृषि मंत्री ने बताया कि राज्य में 8.81 लाख किसानों को मृदा हेल्थ कार्ड जारी किए गए हैं। ये भी बताया कि इस साल कृषि व उद्यान का बजट 792 करोड़ है, जिसमें से 125 करोड़ खर्च हुआ है। टीडीसी को उबारेंगे घाटे से कृषि मंत्री ने विधायक राजेश शुक्ला के प्रश्न के उत्तर में कहा कि तराई बीज और विकास निगम को घाटे से उबारने को गंभीरता से प्रयास चल रहे हैं।

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