देहरादून, जेएनएन। कारगिल युद्ध के 20 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में संस्कृति विभाग की ओर से एक शाम शहीदों के  नाम कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें कलाकारों ने नृत्य नाटिका और नाटक के माध्यम से सैनिक के परिजनों के दर्द की दास्तां बयां की। 

सर्वे सभागार में कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, मसूरी विधायक गणेश जोशी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि 1947, 1962 समेत अन्य युद्धों में भारत के वीरों ने शौर्य का परिचय देकर देश के लिए बलिदान दिया है। 

कारगिल युद्ध में जहां दुश्मन सुरक्षित स्थान पर था, भारतीय सेना दुश्मन के लिए सॉफ्ट टारगेट थी फिर भी सेना ने शौर्य का परिचय देते हुए दुश्मनों को मात देकर उनके कब्जे से अपनी भूमि का आजाद कराया। 

उन्होंने कहा कि कारगिल जैसा युद्ध दुनिया में कभी नहीं हुआ। यह युद्ध दुनिया में शौर्य, वीरता की मिसाल है। इसके बाद नंदा फाउंडेशन की कलाकारों ने नृत्य नाटिका प्रस्तुत कर घर से सैनिक के युद्ध पर जाते हुए दर्द को जीवंत बयां किया। 

इसके बाद कलाकारों ने मोहन राकेश रचित नाटक सिपाही की मां का मंचन किया। इसमें कलाकारों ने सीमा पर युद्ध लड़ रहे सिपाही की गांव में रह रही मां की चिंता, बहन का प्यार और दर्द को जीवंत किया। कलाकारों के स्वाभाविक अभिनय ने दर्शकों की आंखे नम कर दी। 

कार्यक्रम में संस्कृति विभाग की निदेशक बीना भट्ट, बलवीर नेगी, कमल पाठक, मिताली पुनेठा, आरती शाही, कविता, वर्णित राज, मोहित, केतन प्रकाश, आशुतोष जोशी, सौरव नेगी, अभिषेक डोभाल, जयंत रावत, दीपक शर्मा, शालिनी, अभिषेक शाही आदि मौजूद थे।

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Posted By: Bhanu

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