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जागरण विमर्श में रेरा अध्यक्ष ने दी सलाह, बोले- फ्लैट बुकिंग से पहले सजगता जरूरी, नहीं होंगे धोखे का शिकार

Published: Mon, 18 May 2026 09:47 PM (IST)

रेरा उत्तराखंड के अध्यक्ष नरेश सी. मठपाल ने फ्लैट खरीदारों को धोखाधड़ी से बचने के लिए बुकिंग से पहले जागरूक रहने की सलाह दी।

दैनिक जागरण के राज्यस्तरीय अकादमिक विमर्श में रेरा अध्यक्ष नरेश मठपाल ने सुझाए रियल एस्टेट सेक्टर में धोखाधड़ी से बचने के मूलमंत्र।

दैनिक जागरण के राज्यस्तरीय अकादमिक विमर्श में रेरा अध्यक्ष नरेश मठपाल ने सुझाए रियल एस्टेट सेक्टर में धोखाधड़ी से बचने के मूलमंत्र।

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संक्षेप में पढ़ें

सुमन सेमवाल, देहरादून। आम आदमी जीवनभर की पूंजी लगाकर एक अदद आशियाने का सपने देखता है, लेकिन रियल एस्टेट सेक्टर में बिल्डर और प्रापर्टी डीलर कई बार जब सपनों को छलते हैं तो खून-पसीना एक कर जोड़ी गई पाई-पाई खतरे में पड़ जाती है।

जाने-अनजाने और जागरूकता की कमी के कारण नागरिक रियल एस्टेट सेक्टर के मायाजाल में उलझ जाते हैं। लिहाजा, लोग कैसे खुद को धोखाधड़ी से बचा सकते हैं, इसके लिए रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी (रेरा) उत्तराखंड के अध्यक्ष नरेश सी मठपाल ने कई मूलमंत्र दिए।

उन्होंने सोमवार को दैनिक जागरण के राज्यस्तरीय अकादमिक विमर्श में कहा कि फ्लैट और अन्य संपत्ति खरीदारों को बुकिंग से पहले ही जागरूक होकर निवेश करना चाहिए।

रेरा अध्यक्ष मठपाल ने कहा कि किसी भी परियोजना में निवेश से पहले उसका रेरा रजिस्ट्रेशन अवश्य जांच लेना चाहिए। रेरा के वेब पोर्टल पर यह देखना चाहिए कि रजिस्ट्रेशन की स्थिति क्या है, परियोजना की अवधि कब तक की है और उसके प्रमोटर कौन हैं।

इस चरण में तसल्ली हो जाने के बाद जब फ्लैट आदि की बुकिंग के लिए अनुबंध किया जाए तो उसका प्रपत्र रेरा के अनुरूप होना चाहिए।

यह प्रपत्र रेरा के पोर्टल में एक्ट और रूल्स वाले कालम से प्राप्त किया जा सकता है। इस प्रपत्र के अतिरिक्त बिल्डर के किसी भी प्रपत्र को अनुबंध के लिए स्वीकार न करें।

अनुबंध में आर्बिटेशन के नियम को न करें स्वीकार

रेरा अध्यक्ष नरेश सी मठपाल ने कहा कि कई बार बिल्डर अनुबंध के लिए निर्धारित प्रपत्र में आर्बिटेशन का नियम भी दर्ज कर देते हैं।

ऐसी स्थिति में जब किसी विवाद में मामला रेरा पहुंचता है, तो बिल्डर के अधिवक्ता आर्बिटेशन का हवाला देते हैं।

कहा जाता है कि आर्बिटेशन का विकल्प होने की दशा में रेरा सुनवाई नहीं कर सकता है और निपटारा आर्बिटेशन एक्ट के अनुसार ही किया जाएगा।

लिहाजा, यदि किसी अनुबंध में आर्बिटेशन का विकल्प दिया जा रहा है, तो खरीदार उसे स्वीकार न करें।

चमचमाते ब्रोशर के दावों को अनुबंध में करें शामिल

रेरा अध्यक्ष के अनुसार कई बार खरीदार बिल्डरों के चमचमाते ब्रोशर और उसमें दर्ज सुविधाओं के मोहपाश में फंस जाते हैं।

लेकिन, हकीकत में परियोजना और सुविधाएं उससे भिन्न नजर आती हैं। लिहाजा, ब्रोशर की शर्तों और दावों को अनुबंध में अवश्व शामिल करवाएं।

इसके साथ ही जिन सुविधाओं और कामन एरिया आदि का जिक्र किया जा रहा है, उनके आकर-प्रकार और प्रकृति की पूरी जानकारी अनुबंध में शामिल करवाकर खरीदार अपने हितों की रक्षा कर सकते हैं।

भुगतान न रोकें, हर एक आपत्ति को कलमबद्ध करें

कई बार यह देखने में आता है कि परियोजना की प्रगति से संतुष्ट न होकर फ्लैट खरीदार भुगतान में विलंब करते हैं।

यदि ऐसा जरूरी नजर आता है तो भुगतान के विलंब को कारण सहित लिखित में बिल्डर को दें। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो लेट पेमेंट को बिल्डर रेरा के समक्ष खरीदारों के विरुद्ध हथियार के रूप में प्रयोग कर सकते हैं।

कब्जे के आफर को न ठुकराएं

रेरा अध्यक्ष ने कहा कि जब भी बिल्डर या प्रमोटर कब्जे का आफर देते हैं तो उसे ठुकराएं नहीं। यदि कहीं कोई कमी रह गई है तो उसे रेरा के समक्ष शिकायत कर दूर किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में रेरा पूरी तरह खरीदार के साथ खड़ा होता है।

परियोजना में बड़े बदलाव पर दो तिहाई खरीदारों की अनुमति जरूरी

कई बार बिल्डर परियोजना में बड़ा बदलाव कर देते हैं। यदि ऐसा प्रकरण सामने आता है तो दो तिहाई फ्लैट खरीदारों से सहमति प्राप्त करने के लिए कहें और अपनी आपत्ति दर्ज कराएं।

अनुबंध से पहले 10 प्रतिशत से अधिक भुगतान न करें

रेरा अध्यक्ष ने कहा कि बिल्डर की मंशा फ्लैट खरीदार से पहले ही अधिक से अधिक धनराशि प्राप्त करना होती है। याद रखें कि अनुबंध से पहले किसी भी दशा में यूनिट लागत का 10 प्रतिशत से अधिक भुगतान न करें।

इसके साथ ही छूट के लालच में परियोजना के आकार लेने से पहले एकमुश्त भुगतान भी न किया जाए। जो भी अनुबंध कराएं, उसे रजिस्टर्ड करवाएं।

इसके अलावा भुगतान के लिए कंस्ट्रक्शन लिंक्ड पेमेंट प्लान का ही चुनाव करना बेहतर होता है।

जागरूकता के यह नियम जानने भी आवश्यक

  • पार्किंग की लागत यूनिट (फ्लैट) में निहित होती है। अलग से भुगतान न करें और पार्किंग की प्रकृति को लेकर पहले ही लिखित में जानकारी प्राप्त कर लें।
  • 51 प्रतिशत बुकिंग के साथ ही खरीदार तीन माह के भीतर रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन बना लें। संगठन की शक्ति किसी भी धोखाधड़ी के विरुद्ध लड़ाई लड़ने में काम आती है।
  • परियोजना के कंप्लीशन सर्टिफिकेट प्राप्ति के तीन माह के भीतर कामन एरिया आदि की रजिस्ट्री एसोसिएशन के पक्ष में करा लेनी चाहिए। अब इसका शुल्क भी परियोजना लागत के पांच प्रतिशत की जगह 10 हजार रुपये तय कर दिया गया है।
  • यूनिट तैयार होने से पहले या परियोजना में रहने लायक सुविधाओं के विकास से पहले रजिस्ट्री न कराएं। ऐसी स्थिति में खरीदार अपने कई अधिकार बाधित कर देते हैं।
  • यदि फ्लैट पर कब्जे तक रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन का गठन नहीं किया गया है तो बिल्डर को देने वाले मेंटिनेंस चार्ज का भुगतान करते रहें।

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