यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 29, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
उत्तराखंड में वन विश्राम गृहों में ठहरना होगा महंगा, वन विभाग के प्रस्ताव पर शासन कर रहा मंथन
उत्तराखंड में वन विश्राम गृहों में ठहरना महंगा हो सकता है। नए वित्तीय वर्ष में इनकी दरों में 20 से ...और पढ़ें

राज्य ब्यूरो, देहरादून: उत्तराखंड में वन विश्राम गृहों में ठहरना महंगा हो सकता है। नए वित्तीय वर्ष में इनकी दरों में 20 से 40 फीसद की बढ़ोतरी हो सकती है। वन विभाग की ओर से इस संबंध में भेजे गए प्रस्ताव पर शासन गंभीरता से मंथन कर रहा है। कोशिश ये है कि अगले दो माह के भीतर नई दरों का निर्धारण कर दिया जाए।
प्रदेश में वन विभाग के अधीन वन विश्राम भवनों की संख्या 362 है। इनमें अधिकांश आरक्षित-संरक्षित वन क्षेत्रों के भीतर हैं तो कुछ बाहर। पर्यटक स्थलों के साथ ही वन्यजीवन के दीदार को यहां आने वाले सैलानी वन विश्राम गृहों में ठहरना ज्यादा पसंद करते हैं। इनमें कुछ विश्राम गृह तो 150 साल पुराने भी हैं। कार्बेट टाइगर रिजर्व में स्थित वन विश्राम गृहों को लेकर तो मारामारी का आलम रहता है। जाहिर है कि ये विभाग की आय का भी महत्वपूर्ण जरिया हैं। बावजूद इसके इनमें ठहरने की दरों में पिछले 10 वर्षों में कोई इजाफा नहीं हुआ है।वन विश्राम गृहों की दरों का पिछली बार निर्धारण वर्ष 2009 में हुआ था और एक जनवरी 2010 से ये लागू हुई थीं। इसके बाद से दरों के पुनर्निर्धारण की बात तो होती रही, मगर यह मसला विभिन्न कारणों से टलता रहा।
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लंबे इंतजार के बाद वन महकमे ने अब वन विश्राम गृहों की दरों का नए सिरे से निर्धारण के सिलसिले में प्रस्ताव शासन को भेजा है। इसमें दरों में 20 से 40 फीसद की बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। प्रमुख सचिव वन आनंद बद्र्धन ने यह प्रस्ताव मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि इस पर मंथन चल रहा है। सभी पहलुओं पर गौर करते हुए दरों का निर्धारण किया जाएगा।
