यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 28, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Holi 2021: होली खेलें, लेकिन रासायनिक रंगों से बचें; इन बातों का भी रखें खास ध्यान
Holi 2021 वरिष्ठ चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल आर्य ने बताया कि सिंथेटिक रंगों में ब्रोमाइड के अलावा क्रोमियम कॉपर ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, देहरादून। Holi 2021 वरिष्ठ चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल आर्य ने बताया कि सिंथेटिक रंगों में ब्रोमाइड के अलावा क्रोमियम, कॉपर सल्फेट, आयरन सल्फाइड, जिंक, निकिल, ब्लैक लेड ऑक्साइड, क्रोमियम आयोडाइड, सिल्वर एल्युमिनियम ब्रोमाइड, मर्करी सल्फेट, टाइटेनियम, कोबाल्ट, कोबाल्ट अमोनिया, कॉपर सहित कई हानिकारक तत्व और धातु मिले होते हैं।
इनसे त्वचा कैंसर तक होने का खतरा रहता है। इन रंगों से त्वचा में एलर्जी, आखों में जलन और पेट की समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए कोशिश करें कि ऑर्गेनिक या हर्बल रंगों से ही होली खेलें। हालांकि, इन आसानी से इन रंगों की पहचान संभव नहीं है। इससे बचने के लिए फूल, पत्तियों से तैयार रंगों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इन बातों का भी रखें ध्यान
-रंगों को चमकीला बनाने के लिए शीशे का बुरादा इस्तेमाल किए जाता है। शीशे से त्वचा खुरदरी हो सकती है। साथ ही इससे एक्जिमा व त्वचा का अल्सर हो सकता है।
-गुलाल को चमकदार बनाने के लिए उसमें एल्युमीनियम ब्रोमाइड मिलाया जाता है। जो कैंसर जैसी बीमारी को जन्म देता है।
-गुलाल में मिलाए जाने वाले मरकरी सल्फाइड से त्वचा कैंसर हो सकता है।
-कॉपर सल्फेट आंखों में एलर्जी और जलन पैदा करता है। इसके अधिक प्रयोग से आंखों की रोशनी तक जा सकती है।
-गीले रंगों में जेंशियन वायोलेट मिलाया जाता है। जो त्वचा के प्राकृतिक रंग को प्रभावित कर सकता है।
जरूरतमंद बच्चों को बांटी पिचकारी व रंग
गूंज संस्था ने जरूरतमंद बच्चों को पिचकारी, उपहार व होली के रंग भेंट कर उनके साथ होली खेली। संस्था की अध्यक्ष डॉ. सोनिया आनंद रावत ने अपने सहयोगियों भावना गोस्वामी आदि के साथ कुलड़ी पार्किंग में बच्चों को उपहार भेंट किए। डॉ. सोनिया आनंद रावत ने कहा कि मैंने गरीबी को करीब से देखा है और होली के मौके पर हमें भी इंतजार रहता था कि कब हमें रंग-पिचकारी मिलेगी और हम होली खेलेंगे।
