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हिमालयी ग्लेशियरों का चौंकाने वाला पिघलाव: सबसे तेज गति से पीछे हट रहा खतलिंग, मिलम में बनीं झीलें

Published: Sun, 11 Oct 2026 09:08 AM (IST)Updated: Sun, 11 Oct 2026 09:28 AM (IST)

भारतीय मध्य हिमालय के ग्लेशियरों के पीछे हटने की गति में भारी अंतर पाया गया है, जो 3.7 से 88 मीटर प्रतिवर्ष तक है।

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सुमन सेमवाल, देहरादून। भारतीय मध्य हिमालय के ग्लेशियरों के पीछे हटने की गति में भारी अंतर सामने आया है। 50 शोध अध्ययनों की समीक्षा में यह दर 3.7 से 88 मीटर प्रतिवर्ष के बीच दर्ज की गई।

औसत दर मुख्य पाठ में 23.23 मीटर प्रतिवर्ष बताई गई है, जबकि सारांश तालिका में 23 ग्लेशियरों का औसत 24.63 मीटर है। वाडिया हिमलाय भूविज्ञान संस्थान और यूपीईएस का यह अध्ययन हाल में डिस्कवर जियोसाइंस में प्रकाशित किया गया है।

3412 रिकार्ड से चुने गए 50 अध्ययन

शोधकर्ताओं ने साइंसडायरेक्ट से 409 और स्प्रिंगर नेचर से 3003 सहित 3412 रिकार्ड जुटाए। जांच के बाद 50 अध्ययन चुने गए। इनमें उपग्रह चित्रों, रडार, डिजिटल ऊंचाई मॉडल और मैदानी मापों से ग्लेशियरों की लंबाई, क्षेत्रफल, द्रव्यमान और हिमरेखा में बदलाव का विश्लेषण किया गया।

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उत्तराखंड के चार नदी उप-बेसिनों में 968 ग्लेशियरों को शामिल किया गया। इनमें यमुना के 52, भागीरथी के 238, अलकनंदा के 407 और कालीगंगा के 271 ग्लेशियर हैं। इनका कुल क्षेत्रफल लगभग 2857 वर्ग किलोमीटर है।

खतलिंग में 88 मीटर सालाना पीछे हटा अग्रभाग

गढ़वाल के खतलिंग ग्लेशियर का अग्रभाग वर्ष 1965 से 2014 के बीच चार किलोमीटर से अधिक पीछे हटा। औसत दर 88 मीटर प्रतिवर्ष रही। भागीरथी खरक में यह दर सात मीटर और सतोपंथ में अलग-अलग अध्ययनों के अनुसार 2.88, 5.7 तथा 8.45 मीटर प्रतिवर्ष रही।

कुमाऊं के मिलम ग्लेशियर का अग्रभाग वर्ष 2004 से 2014 के बीच लगभग 480 मीटर पीछे हटा। एक अध्ययन में इसके सामने 47 हिमनदीय झीलों का उल्लेख है।

पिंडारी, टिपरा और गंगोत्री में भी बदलाव

पिंडारी ग्लेशियर वर्ष 1976 से 2017 के बीच औसतन नौ मीटर प्रतिवर्ष पीछे हटा। वर्ष 2009-10 में यह दर 73.27 मीटर रही। टिपरा ग्लेशियर का क्षेत्रफल 1962 से 2002 के बीच 18 प्रतिशत घटा और अग्रभाग 535 मीटर पीछे हटा। बाद में इसकी दर 13.4 से बढ़कर 21.3 मीटर प्रतिवर्ष हुई। हिमरेखा 76 मीटर ऊपर गई और संचय क्षेत्र अनुपात 0.47 रहा।

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गंगोत्री में वर्ष 2020-24 के दौरान औसत वार्षिक द्रव्यमान संतुलन ऋणात्मक 1.03 मीटर जल-समतुल्य रहा। डोकरानी में वर्ष 1992-2013 के दौरान यह कुल ऋणात्मक 3.86 मीटर था। बर्फ के जल-समतुल्य आयतन में 27.01 मिलियन घन मीटर की कमी और औसतन 2.25 मिलियन घन मीटर वार्षिक नुकसान दर्ज किया गया।

तापमान और बर्फबारी का प्रभाव

वर्ष 1980-2000 के दौरान क्षेत्रीय वर्षा में 21 मिलीमीटर प्रतिवर्ष की गिरावट और तापमान में 0.047 डिग्री सेल्सियस प्रतिवर्ष वृद्धि बताई गई। वर्ष 2000 के बाद वर्षा में 32 मिलीमीटर प्रतिवर्ष वृद्धि और तापमान की प्रवृत्ति 0.00014 डिग्री प्रतिवर्ष रही। नंदा देवी क्षेत्र के आठ ग्लेशियरों में वर्ष 1980-2017 के दौरान क्षेत्रफल 10 प्रतिशत घटा और हिमरेखा करीब 500 मीटर ऊपर गई।