हिमाचल में बर्फबारी: किन्नौर में सड़क पर आ गया बर्फ का पहाड़, ग्लेशियर गिरने से सीमावर्ती सड़क बंद; भेड़पालक फंसे
हिमाचल के किन्नौर में लगातार बर्फबारी से जनजीवन प्रभावित हुआ है, जहां सड़क पर ग्लेशियर आने से आवाजाही बाधित हो गई है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भेड़पालक फंसे हैं।
HighLights
किन्नौर में लगातार बर्फबारी से सड़क पर ग्लेशियर आया।
छितकुल-दुमती सीमावर्ती मार्ग पूरी तरह से बंद हो गया।
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भेड़पालक फंसे, सेब तुड़ाई प्रभावित।
जागरण टीम, रिकांगपिओ। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दो दिन से लगातार बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश का दौर जारी है। पहली ही बर्फबारी के बाद किन्नौर में सड़क पर बर्फ का पहाड़ आ गया। हिमखंड सड़क पर आने से आवाजाही बाधित हो गई। लगातार बर्फबारी के कारण छितकुल के रानी कंडा क्षेत्र में ग्लेशियर आ गया। हालांकि, किसी प्रकार के जानी नुकसान की सूचना नहीं है।
ग्लेशियर और बर्फबारी के कारण छितकुल-दुमती सीमावर्ती मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्र में आवाजाही प्रभावित हुई है। छितकुल में करीब 4 से 6 इंच तथा कूनो चारंग क्षेत्र में 10 इंच तक बर्फबारी होने की सूचना है।
बर्फबारी में फंसे भेड़पालक
लगातार बर्फबारी के कारण किन्नौर के ऊंचाई वाले क्षेत्र में कुछ भेड़पालक फंस गए हैं। बर्फ अधिक पड़ जाने के कारण वह निचले क्षेत्र की तरफ नहीं आ पा रहे हैं। कुछ पशुधन के मरने की भी सूचना है।
मौसम के अचानक बदले मिजाज से जनजीवन प्रभावित
मौसम के अचानक बदले मिजाज से जिले में जनजीवन प्रभावित हुआ है और तापमान में गिरावट आने से ठंड बढ़ गई है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इस सीजन का पहला हिमपात दर्ज किया गया है। लोगों ने ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़ों का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
चारंग में बिजली आपूर्ति बाधित
कूनो चारंग क्षेत्र में पिछले दिन से विद्युत आपूर्ति बाधित होने के कारण ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार खराब मौसम और बर्फबारी के बीच बिजली आपूर्ति बाधित रहने से लोगों की दिक्कतें और बढ़ गई हैं।
सेब तुड़ाई पर मौसम की मार
मौसम के अचानक करवट लेने से जिले के सेब उत्पादक भी चिंतित हैं। कल्पा और पूह विकास खंडों में इन दिनों सेब तुड़ाई का कार्य जोरों पर चल रहा है। बारिश और बर्फबारी के कारण तुड़ाई कार्य प्रभावित होने के साथ-साथ तैयार सेब को मंडियों तक पहुंचाने में भी परेशानी सामने आ रही है। बागवानों को आशंका है कि यदि तापमान में और गिरावट आती है तो ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पेड़ों पर मौजूद सेब की फसल को नुकसान हो सकता है।
