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हिमालय में बदल रही भालुओं की शीतनिद्रा, एशियाई काले भालू ने किया लाल पांडा का शिकार

Published: Wed, 04 Nov 2026 03:40 PM (IST)

हिमालय में बदलते मौसमी चक्र और भोजन की उपलब्धता के कारण भालुओं के व्यवहार में बदलाव आया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

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जागरण संवाददाता, देहरादून। हिमालय में बदलते मौसमी चक्र और भोजन की उपलब्धता वन्यजीवों के व्यवहार को प्रभावित कर रहे हैं। इसका एक असाधारण उदाहरण बंगाल के सिंगालिला राष्ट्रीय उद्यान में सामने आया है।

यहां एशियाई काले भालू ने संकटग्रस्त लाल पांडा का शिकार किया। भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ), देहरादून के तीन शोधकर्ताओं ने इस घटना का पहला प्रमाणित फोटोग्राफिक दस्तावेज तैयार किया है। शोधकर्ताओं में पूजा कुमारी, बिलाल हबीब और गोविंदन वीरास्वामी गोपी शामिल रहे। अध्ययन को 26 अक्टूबर 2026 को जर्नल आफ थ्रेटेंड टैक्सा में प्रकाशित किया गया।

शोध के अनुसार, यह घटना उद्यान के दक्षिणी क्षेत्र के सिरी ब्लाक में समुद्र तल से लगभग 3,235 मीटर (करीब 10,614 फीट) की ऊंचाई पर दर्ज की गई। कैमरा ट्रैप ने 11 फरवरी 2024 को एक लाल पांडा को भुजपत्र के पेड़ पर चढ़ते हुए रिकॉर्ड किया था।

चार दिन बाद, 15 फरवरी को शाम 6 बजकर 25 मिनट पर उसी कैमरे ने एक एशियाई काले भालू को वहां पहुंचते, पेड़ पर चढ़ते और मुंह में लाल पांडा का शिकार दबाकर नीचे उतरते हुए कैद किया। लाल पांडा के प्राकृतिक शत्रुओं से जुड़े प्रत्यक्ष प्रमाण अब तक बहुत कम उपलब्ध थे। ऐसे में यह रिकॉर्ड वन्यजीवों के बीच शिकारी और शिकार के संबंधों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

75 कैमरा ट्रैप से जुटाए गए आंकड़े

शोध के लिए दिसंबर 2023 से मार्च 2024 के बीच राष्ट्रीय उद्यान में एक वर्ग किलोमीटर के खंडों में 75 कैमरा ट्रैप लगाए गए थे। प्रत्येक कैमरा औसतन 108 दिनों तक सक्रिय रहा। पूरे अध्ययन में कुल 8,050 कैमरा-दिवस का रिकॉर्ड जुटाया गया। सिंगालिला राष्ट्रीय उद्यान 78.6 वर्ग किलोमीटर में फैला है और इसकी ऊंचाई 2,000 से 3,636 मीटर तक है।

पेड़ की बनावट ने आसान किया शिकार

शोधकर्ताओं के अनुसार, शिकार वाली जगह पर पेड़ बहुत ऊंचे नहीं थे और उनकी बनावट कुछ झुकी हुई थी। पेड़ों की शाखाओं और छतरी के बीच पर्याप्त दूरी होने से लाल पांडा के लिए ऊपर की ओर सुरक्षित भागना मुश्किल हो सकता था।

इसके विपरीत एशियाई काला भालू पेड़ों पर चढ़ने में सक्षम होता है। भालू के अवसरवादी भोजन व्यवहार और उस क्षेत्र में प्राकृतिक भोजन की मौसमी उपलब्धता ने भी इस घटना में भूमिका निभाई हो सकती है।

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