यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 18, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
ज्ञान गंगा : केंद्र बनाम राज्य हो गया अनुदान का मामला, हाईकोर्ट ने कहा दो माह में सुलझाएं मसला
सहायताप्राप्त अशासकीय डिग्री कालेजों को उम्मीद है कि अब उलझन सुलझ ही जाएगी। पंगा राज्य सहायता का है। गढ़वाल विश्वविद्यालय ...और पढ़ें

रविंद्र बड़थ्वाल, देहरादून। सहायताप्राप्त अशासकीय डिग्री कालेजों को उम्मीद है कि अब उलझन सुलझ ही जाएगी। पंगा राज्य सहायता का है। गढ़वाल विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा मिलने के बाद पहले से संबद्ध ये कालेज राज्य विश्वविद्यालय से संबद्धता लेने को तैयार नहीं हैं। केंद्रीय विश्वविद्यालय ने इन्हें असंबद्ध होने का फरमान थमा दिया तो सरकार ने राज्य विश्वविद्यालय से संबद्धता लेने का दबाव बढ़ाया। सरकार का तर्क है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय से संबद्धता जारी रखनी है तो वहीं से मदद भी लो। सरकार से मदद चाहिए तो फिर केंद्र के आदेश नहीं चलेंगे। खींचतान का यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि केंद्र और राज्य की सरकारें दो माह में अनुदान का मसला सुलझाएं। जब तक मामला सुलझता है तब तक राज्य सरकार अनुदान देना जारी रखेगी। कालेज खुश हैं कि मसला सुलझा गया। इधर, राज्य सरकार भी खुश है कि देर-सबेर केंद्र को ही कालेजों को अनुदान देना होगा।
खेल तो कुर्सी का ही है
उच्च शिक्षा मंत्री डा धन सिंह रावत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के बीच लंबे अरसे से राजनीतिक मल्ल युद्ध चल रहा है। दोनों की समर भूमि एक ही है श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र। क्षेत्र में राज्य का पहला व्यावसायिक कालेज खोला गया तो इसके बाद खिर्सू को नया डिग्री कालेज मंत्रीजी ने थमा दिया। प्रदेश के एक लाख से ज्यादा डिग्री छात्र-छात्राओं को टैबलेट देने और दस नए डिग्री कालेज खोलने की मुख्यमंत्री की घोषणाओं को उच्च शिक्षा विभाग ने जिस तेजी से जमीन पर उतारा है, उससे विपक्षी भी दांतों तले अंगुली दबाए हुए हैं। कांग्रेस के सेनापति अपने क्षेत्र और फिर प्रदेश में मिल रही चुनौती भांप रहे हैं। चुनावी साल में विश्वविद्यालयों को जल्द दीक्षांत समारोह देने के आदेश देकर मंत्रीजी अभी बैठक से निपटे ही थे कि गोदियाल ने छात्रसंघ चुनाव को लेकर नई बिसात बिछा दी है। अब मामले में सरकार उलझी हुई है।
अब अंब्रेला एक्ट की है बारी
राजभवन के रुख में बदलाव महसूस किया जा रहा है। इसी बूते अंब्रेला एक्ट या राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम के अस्तित्व में आने की संभावना जताई जाने लगी है। दरअसल डेढ़ साल से ज्यादा समय के बाद उच्च शिक्षा परिषद संशोधन विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद ये उम्मीद जगी है। सरकार इस पर राजभवन की मुहर लगाने के लिए लंबे समय से हाथ-पांव मार रही थी। नए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) से उच्च शिक्षा मंत्री डा धन सिंह रावत ने मुलाकात की। लंबित विधेयकों पर भी चर्चा हुई। मंत्रीजी की फरियाद ने असर दिखाया। उच्च शिक्षा परिषद संशोधन विधेयक राजभवन से कानून की शक्ल लेकर बाहर निकला। राज्य विश्वविद्यालय विधेयक पर नजरें लगी हैं। यह विधेयक सदन से दोबारा पारित कर राजभवन को भेजा गया है। मंत्रीजी राज्यपाल से वार्ता के बाद उत्साहित हैं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही यह विधेयक कानून की शक्ल लेगा।
रोजगार पर मंत्रीजी ने ठोकी ताल
शिक्षा प्रदेश का सबसे बड़ा विभाग है। इसका सीधा सा मतलब ये है कि विभाग सबसे ज्यादा रोजगार मुहैया करा रहा है। ऐसे में कोई ये सवाल उठाए कि पौने पांच साल में राज्य में सरकारी भर्तियां नहीं हुईं तो शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय को गुस्सा आना स्वाभाविक है। यही हुआ, जब पूर्व मुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस चुनाव अभियान समिति अध्यक्ष हरीश रावत ने चुनौती दी कि 3200 भर्तियां भी हुईं तो वह राजनीति से ही संन्यास ले लेंगे। शिक्षा मंत्री तुरंत सक्रिय हुए और तकरीबन 10 हजार रोजगार देने के आंकड़े गिना दिए। राज्य में प्राइमरी शिक्षकों, एलटी शिक्षकों और प्रवक्ता पदों पर भर्ती के बारे में बताया तो चार हजार से ज्यादा अतिथि शिक्षकों की तैनाती की जानकारी भी दी। सदाशयता देखिए, आंकड़ों के जवाब में संन्यास लेने को नहीं कहा। बोले, गलत आंकड़े देने वालों को दुरुस्त कर लें। मंत्रीजी ने ताल ठोकी तो साथी भी बरसे।
