अर्धकुंभ से पहले हरिद्वार में कचरा प्रबंधन की चुनौती, अब भी जमा है 3.74 लाख मीट्रिक टन कूड़े का पहाड़
हरिद्वार में अर्धकुंभ की तैयारियों के बीच ठोस कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन गया है, प्रतिदिन 90 टन कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण नहीं हो पाता।


समय कम है?
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राज्य ब्यूरो, देहरादून । अर्धकुंभ की तैयारियों के बीच हरिद्वार के सामने सबसे बड़ी चुनौती सड़क, पार्किंग या ट्रैफिक नहीं बल्कि ठोस कचरा प्रबंधन की है। धर्म नगरी में प्रतिदिन 431 टन कचरा निकलता है।
इसमें से 126 टन सूखा कचरा, 155 टन गीला कचरा और 60 टन कचरा लैंडफिल के माध्यम से निस्तारित हो रहा है। इसके बावजूद प्रतिदिन करीब 90 टन कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन नहीं हो पाता।
यह अनिस्तारित कचरे का ढेर बना रहा है, उधर वर्षों से डंपसाइटों पर करीब 3.74 लाख मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट (पुराना कचरा) अभी भी जमा है। आगामी अर्धकुंभ से पहले नगर निगम और मेला प्रशासन के सामने कचरा प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती बन गया है, लेकिन अभी तक इसका कोई हल नहीं निकाला जा सका है।
अब तक कोई हल नहीं
हरिद्वार उत्तराखंड के सर्वाधिक ठोस कचरा उत्पन्न करने वाले जिलों में शामिल है। गंगा घाट, मंदिर, होटल, धर्मशालाएं और वर्षभर चलने वाला धार्मिक पर्यटन नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर लगातार दबाव बनाए रखते हैं।
कांवड़ यात्रा, सोमवती अमावस्या, गंगा दशहरा और अन्य बड़े स्नान पर्वों के दौरान कचरे की मात्रा सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है। सामान्य दिनों में ही पूरी क्षमता से कचरे का निस्तारण नहीं हो पा रहा है, तो अर्धकुंभ के दौरान अतिरिक्त दबाव में कचरा निस्तारण कैसे होगा, यह बड़ी चुनौती है। धार्मिक आयोजनों के समय श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ने से कचरे की मात्रा भी तेजी से बढ़ती है।
पुराने कचरे का संकट बरकरार
हरिद्वार की चुनौती केवल रोज निकलने वाले नए कचरे तक सीमित नहीं है। वर्षों से जमा पुराना कचरा बड़ा मुद्दा बना हुआ है। जिले की 15 डंपसाइटों पर कुल 7.48 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा जमा था। इनमें से 3.74 लाख मीट्रिक टन कचरे का बायोमाइनिंग के जरिए निस्तारण किया जा चुका है, लेकिन अभी भी करीब 3.74 लाख मीट्रिक टन कचरा डंपसाइटों पर पड़ा है।
अब तक चार डंपसाइट पूरी तरह साफ हो चुकी हैं, पांच पर काम चल रहा है, जबकि छह डंपसाइटों पर काम शुरू होना बाकी है। अर्धकुंभ से पहले इन साइटों की सफाई की गति बढ़ाना प्रशासन के लिए अहम चुनौती होगी।
अर्धकुंभ-2027 को देखते हुए हरिद्वार में ठोस कचरा प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। पुराने कचरे के निस्तारण और रोजाना निकलने वाले कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की क्षमता बढ़ाई जा रही है। हमारा लक्ष्य सौ प्रतिशत कचरा निस्तारण करना है। - राम सिंह कैड़ा, शहरी विकास मंत्री
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