हरिद्वार अर्धकुंभ 2027: धार्मिक आयोजनों का पूरा शेड्यूल जारी, पहली बार होगा अमृत स्नान
गुरुपूर्णिमा पर श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने हरिद्वार अर्धकुंभ-2027 का विस्तृत कार्यक्रम घोषित किया, जिसमें पहली बार अमृत स्नान होगा। जूना अखाड़ा ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

हरिद्वार स्थित हरकी पैड़ी।
HighLights
गुरुपूर्णिमा पर अर्धकुंभ-2027 का विस्तृत कार्यक्रम घोषित
हरिद्वार अर्धकुंभ में पहली बार होगा अमृत स्नान
23 दिसंबर 2026 को धर्मध्वजा स्थापना, तैयारियां तेज
जागरण संवाददाता, हरिद्वार। गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय सचिव एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महासचिव श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने अर्धकुंभ-2027 के धार्मिक आयोजनों का विस्तृत कार्यक्रम घोषित कर दिया।
श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा, माया देवी मंदिर में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि अर्धकुंभ और कुंभ सनातन संस्कृति, साधु-संत परंपरा और भारतीय आध्यात्मिक विरासत का विराट उत्सव है।
हरिद्वार में आयोजित अर्धकुंभ कुंभ मेले की तरह दिव्य व भव्य होगा। अर्धकुंभ में पहली बार अमृत स्नान होगा।

श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने बताया कि अर्धकुंभ-2027 के लिए जूना अखाड़ा ने अपनी तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। घोषित कार्यक्रम के अनुसार 21 नवंबर 2026 को गोधूलि लग्न, हरिप्रबोधिनी एकादशी के अवसर पर तपस्वियों का नगर प्रवेश होगा।
इसके बाद एक दिसंबर 2026 को अभिजीत मुहूर्त एवं भैरव अष्टमी के अवसर पर छावनी का भूमि पूजन कार्यक्रम होगा।
23 दिसंबर अभिजीत मुहूर्त एवं श्री दत्तात्रेय जयंती के अवसर पर धर्मध्वजा स्थापना कार्यक्रम होगा। साथ ही, संन्यासी एवं नागा संन्यासियों की छावनी में रोट पूजन कार्यक्रम होगा।
14 जनवरी 2027 को उत्तरायणी स्नान एवं सूर्योपासना के साथ पेशवाई निकाली जाएगी। इसके बाद छह मार्च 2027 को त्रयोदशी घनिष्ठा नक्षत्र पर प्रथम अमृत स्नान होगा।
फिर 8 मार्च 2027 को सोमवती अमावस्या पर दूसरा अमृत स्नान और 14 अप्रैल 2027 की चैत्र शुक्ल पक्षक अष्टमी को तीसरा अमृत स्नान होगा।
श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने कहा कि देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए संत समाज पूरी तरह तैयार है।
हरिद्वार अर्धकुंभ 2027 को दिव्य, भव्य तथा आध्यात्मिक गरिमा के अनुरूप संपन्न कराया जाएगा।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी कई अवसरों पर स्पष्ट कर चुके हैं कि अर्धकुंभ-2027 को दिव्य, भव्य और ऐतिहासिक स्वरूप में आयोजित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री स्वयं तैयारियों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं और अधोसंरचना, सड़क, घाट, पेयजल, विद्युत, सुरक्षा, यातायात तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े कार्यों में तेजी लाई जा रही है।
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