देहरादून, [रविंद्र बड़थ्वाल]: प्रदेश की माली हालत खराब है तो हर महीने वेतन-भत्ते, पेंशन और मानदेय का खर्च आमदनी से कहीं ज्यादा है। सातवां वेतनमान का बोझ बढऩे से राज्य सरकार के लिए हर माह खर्च की पूर्ति में मुश्किलों से जूझना पड़ रहा है। नतीजतन चालू  महीने अक्टूबर में तीसरी दफा कर्ज की नौबत आ पड़ी है। राज्य सरकार फिर 300 करोड़ रुपये बाजार से उधार लेने जा रही है। 

31 अक्टूबर तक यह ऋण सरकार के खाते में आ जाएगा। इससे चालू वित्तीय वर्ष में बाजार का कर्ज बढ़कर 3500 करोड़ पहुंच जाएगा। वहीं चालू वित्तीय वर्ष में राज्य पर अब कर्ज बढ़कर 44 हजार करोड़ के पार पहुंचने जा रहा है। 

प्रदेश पर कर्ज का मर्ज बढ़ता ही जा रहा है। राज्य कर्मचारियों को पहले सातवां वेतन और अब 50 फीसद एरियर और कई निगमों-उपक्रमों व निकायों को भी सातवां वेतनमान देने के फैसले के बाद सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ गया है। इस वजह से सरकार चालू माह में ही दो बार 500-500 करोड़ यानी कुल 1000 करोड़ कर्ज ले चुकी है। 

इसके बावजूद भी सरकार के लिए एरियर की अदायगी का मसला सुलझ नहीं रहा है। नतीजतन तीसरी दफा 300 करोड़ का कर्ज लिया जा रहा है। अगले मंगलवार तक यह कर्ज सरकारी खजाने में पहुंच जाएगा। यह नौबत पहली बार है जब सातवें महीने में सरकार को 1300 करोड़ कर्ज लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। 

दरअसल, इसवक्त सरकार 'आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया' की समस्या से जूझ रही है। राज्य की कुल मासिक आमदनी करीब 1400 करोड़ है, जबकि वेतन-भत्तों-मानदेय देने पर हर महीने करीब 1500 करोड़ का खर्च बैठ रहा है। ऐसे में एरियर देने के फैसले पर अमल को कर्ज लेना मजबूरी बन चुका है। राज्य पर कर्ज का बोझ 44 हजार करोड़ के पार  पहुंच रहा है। 

इस वित्तीय वर्ष में अब तक 2700 करोड़ कर्ज लिया जा चुका है। बीते वित्तीय वर्ष 2016-17 में राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़कर 40793.69 करोड़ हो गया था। नए वित्तीय वर्ष में राज्य पर कुल कर्ज राज्य के सालाना बजट से ज्यादा है। इस वजह से रिजर्व बैंक राज्य के लिए चालू वित्तीय वर्ष में कर्ज की सीमा 5850 करोड़ से बढ़ाकर 6422 करोड़ कर चुका है। 

राज्य को प्रति माह होने वाली औसत आमदनी 

जीएसटी-550 करोड़

आबकारी-170 करोड़

स्टांप-रजिस्ट्रेशन-65 करोड़

खनन-30 करोड़

वन-25 करोड़

ऊर्जा-30 करोड़

परिवहन-40 करोड़

केंद्रपोषित योजनाएं-450 करोड़

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Edited By: Bhanu