जागरण संवाददाता, देहरादून। दून में हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में अतिक्रमण के विरुद्ध की गई कार्रवाई में बिना नोटिस दिए एक डेयरी को तोड़ना जिला प्रशासन को भारी पड़ गया। राजपुर रोड पर जाखन में गत वर्ष 24 अक्टूबर को अतिक्रमण पर कार्रवाई में नव अंजली डेयरी की दो दुकानें ध्वस्त की गई थीं। डेयरी स्वामी ने प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ अदालत की शरण ली थी। अपर जिला जज (द्वितीय) बृजेंद्र सिंह की अदालत ने मामले में स्टेट आफ उत्तराखंड की ओर से कलेक्टर, एमडीडीए उपाध्यक्ष, एसडीएम और सिंचाई विभाग के चार अफसरों को तीस दिन के भीतर डेयरी का दोबारा निर्माण कराने व डेयरी संचालक को हर्जाने के तौर पर दस लाख रुपये की राशि देने के आदेश दिए हैं।

अदालत में दी शिकायत में दून विहार इंजीनियर्स एन्क्लेव जाखन के निवासी रमेश चंद और उनकी पत्नी संतोष ने प्रशासन पर उनकी संपत्ति तोड़ने का आरोप लगाया था। आरोप था कि उनकी नव अंजली डेयरी के नाम से टीनशेड में दो दुकानें थीं। दावा यह भी किया गया कि यह संपत्ति कभी सड़क का हिस्सा नहीं रही। आरोप है कि प्रशासन की टीम ने 24 अक्टूबर-20 को डेयरी तोड़ दी, जबकि 19 नवंबर को इसे पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया।

डेयरी मालिक रमेश के अनुसार उन्हें प्रशासन ने नोटिस ही नहीं दिया था, जबकि सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अंतर्गत तीन हफ्ते पहले नोटिस दिया जाना चाहिए। फिर अगले तीन हफ्ते सुनवाई और अगले चार हफ्ते में जिलाधिकारी को निर्णय लेना चाहिए थे। अधिवक्ता टीएस बिंद्रा की ओर से प्रशासन की टीम पर सुप्रीम कोर्ट के नियम न मानने का आरोप लगाया गया। डेयरी मालिक ने 20 लाख रुपये प्रतिपूर्ति व दोबारा निर्माण कराकर देने की मांग रखी थी।

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सुनवाई के बाद अदालत ने नोटिस के बिना निर्माण तोड़ने की शिकायत सही पाई। अदालत ने प्रशासन की टीम को अगले 30 दिन के भीतर डेयरी का निर्माण उसी सूरत में कराने के आदेश दिए, जैसा ध्वस्त करने से पहले था। तत्कालीन एसडीएम गोपाल राम बेनिवाल, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता डीके सिंह, सहायक अभियंता अरुण कुमार सिंह व विजय सिंह रावत एवं जिलेदार युसूफ पर 10 लाख रुपये हर्जाना लगाया गया। अदालत ने आदेश दिए हैं कि उक्त पांचों को संयुक्त रूप से हर्जाना डेयरी मालिक को देना होगा।

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Edited By: Raksha Panthri