देहरादून, जेएनएन। प्रेमनगर में किए जा रहे अतिक्रमण पर टास्क फोर्स की अनदेखी से न सिर्फ सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं, बल्कि यह भी दिख रहा है कि क्षेत्र विशेष के अतिक्रमण के आगे अधिकारी नतमस्तक नजर आ रहे हैं। प्रेमनगर निवासी आकाश यादव की याचिका में भले ही यहां के सरकारी भूमि के खसरा नंबर 23 पर पसरे अतिक्रमण का जिक्र था, मगर कोर्ट ने पूरे दून के अतिक्रमण की स्थिति तलब कर ली है। यहां तक कि मुख्य सचिव व लोनिवि सचिव पर अवमानना की तलवार भी लटक गई है।

अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत दून में दो बार, जबकि प्रेमनगर में तीन बार यह कार्रवाई की जा चुकी है, मगर अधिकारियों की अनदेखी के चलते अभी भी हालत ज्यादा नहीं बदले हैं। बेशक दून में पहले के लगे लाल निशान ही व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहे हैं, मगर प्रेमनगर में तो धड़ल्ले से नए अतिक्रमण खड़े किए जा रहे हैं। कुल मिलाकर हाईकोर्ट के आदेश पर वर्ष 2018 में चलाया गया अतिक्रमण हटाओ अभियान अभी भी मंजिल से दूर है।

अभियान पर एक नजर

जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने 18 जून 2018 को देहरादून में अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे। इस आदेश पर प्रशासन ने चार जोन बनाते हुए करीब तीन महीने तक शहर में अतिक्रमण पर कार्रवाई की थी। आधा-अधूरा अतिक्रमण हटाने के बाद कार्रवाई धीमी पड़ गई। इसमें लगभग आठ हजार अतिक्रमण हटाए गए थे, जबकि नौ हजार से ज्यादा चिह्नित किए गए। फिर एक साल बाद सितंबर-2019 में फिर से अतिक्रमण पर जेसीबी गरजी, मगर ढाई हफ्ते बाद ही प्रशासन फिर बैकफुट पर आ गया और अभियान ठप हो गया। इसके बाद अभियान पूरे मनोयोग से चलाया ही नहीं गया।

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43 फीसद अतिक्रमण पूर्व चिह्नित

पूर्व में चलाए गए अभियान में टास्क फोर्स ने 4617 अतिक्रमण ध्वस्त किए, जबकि चिह्नीकरण आठ हजार से अधिक का किया गया। इस तरह देखें तो पूर्व में चिह्नित 43 फीसद से अधिक अतिक्रमण पर अभी भी कार्रवाई होनी शेष है। इसके अलावा यह भी दिख रहा है कि इस बीच नए अतिक्रमण भी खड़े हो चुके हैं।

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Edited By: Raksha Panthari