देहरादून, जेएनएन। सीधी भर्ती के रोस्टर में किए गए बदलाव के विरोध में उत्तराखंड जनरल-ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन ने सरकार को कोर्ट जाने की चेतावनी दी है। एसोसिएशन की ओर से बुधवार को मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा गया कि रोस्टर का पहला पद योग्यता के आधार पर भरा जाना चाहिए, न कि आरक्षण से। यहां पहला पद आरक्षित वर्ग को दे दिया गया है जो अनुचित है। एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक जोशी ने कहा कि सितंबर 2019 में कार्मिक विभाग की ओर से सीधी भर्ती के रोस्टर में पहले पद को आरक्षित श्रेणी से हटाकर अनारक्षित वर्ग को दे दिया गया था।

वहीं, राज्य में नियत 19 प्रतिशत पदों के विपरीत बीस पदों की त्रुटि को ठीक करते हुए आरक्षित वर्ग के प्रतिशत के अनुसार 19 पदों को चिह्नित किया गया था। इस पर एसोसिएशन को कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन बीते मार्च महीने में सरकार ने पदोन्नति में आरक्षण मुक्त व्यवस्था लागू करने के साथ-साथ सभी वर्गो में सामंजस्य स्थापित करने के लिए रोस्टर में संशोधन कर दिया। जिससे पहला पद फिर से आरक्षित वर्ग को चला गया। इसे लेकर प्रदेश के तमाम जनरल-ओबीसी वर्ग के कार्मिकों में आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने कहा कि बिना किसी आधार के रोस्टर में बदलाव किया गया है। एसोसिएशन के प्रांतीय महासचिव वीरेंद्र सिंह गुसाईं ने कहा कि सरकार सीधी भर्ती के रोस्टर की सितंबर 2019 की व्यवस्था को पुन: बहाल करे। ऐसा नहीं किया जाता है तो एसोसिएशन इसे लेकर नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगी और आंदोलन भी किया जाएगा।

निगम कर्मियों को आपदा राहत कोष से मिलेगा वेतन

समय से वेतन भुगतान न होने के कारण निगम कर्मियों में आक्रोश है। बुधवार को कार्मिकों ने पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर से मुलाकात की और समस्या के निराकरण की मांग की। सचिव ने एक सप्ताह के भीतर आपदा राहत कोष से वेतन भुगतान का आश्वासन दिया है। राज्य निगम कर्मचारी-अधिकारी महासंघ का प्रतिनिधिमंडल पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर से मिला। महासंघ के महासचिव वीएस रावत ने बताया कि गढ़वाल मंडल विकास निगम और कुमाऊं मंडल विकास निगम के कार्मिकों को समय से वेतन नहीं मिलने की समस्या महासंघ ने मुख्यमंत्री के समक्ष रखी थी।

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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आपदा राहत कोष से परिवहन निगम को 15 करोड़ रुपये, गढ़वाल मंडल विकास निगम व कुमाऊं मंडल विकास निगम को दो-दो करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी, लेकिन गढ़वाल मंडल विकास निगम व कुमाऊं मंडल विकास निगम को शासन से वित्त अनुमोदन के बाद भी धनराशि जारी नहीं की गई। इस पर आपत्ति जताते हुए राज्य निगम कर्मचारी-अधिकारी महासंघ ने सचिव पर्यटन से कार्रवाई की मांग की। सचिव ने आश्वासन दिया कि इस सप्ताह के भीतर वित्त विभाग से अनुमोदन के बाद दोनों निगमों को दो-दो करोड़ रुपये जारी कर दिए जाएंगे।

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Posted By: Sumit Kumar

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