महंगाई के बीच बप्पा का स्वागत, उत्तराखंड में 25 प्रतिशत तक महंगी हुई मूर्ति
गणेश महोत्सव की तैयारियों के बीच देहरादून में गणेश प्रतिमाओं की कीमतें 25% तक बढ़ गई हैं, जिससे बप्पा का स्वागत महंगा हो गया है।

13 हजार की प्रतिमा अब मिल रही 16 हजार में। जागरण

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जागरण संवाददाता, देहरादून। गणेश महोत्सव की तैयारियों के बीच इस बार बप्पा का स्वागत महंगा पड़ रहा है। प्रतिमा निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और ढुलाई की लागत बढ़ने से गणेश प्रतिमाओं के दाम 25 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।
पिछले वर्ष चार हजार रुपये में मिलने वाली प्रतिमा अब करीब 5200 रुपये और 13 हजार रुपये वाली प्रतिमा 16 हजार रुपये में तैयार हो रही है।
वहीं, पर्यावरण संरक्षण को लेकर आयोजन समितियां इस बार इको फ्रेंडली प्रतिमाओं को प्राथमिकता दे रही हैं। सोमवार को गणपति बप्पा शहर के विभिन्न पंडालों और घरों में विराजमान होंगे। वक्रतुंड, एकदंत, महोदर, गजानन, लंबोदर, विकट और विघ्नराज स्वरूप की प्रतिमाओं की मांग है।
जूट के रेशे, बांस के डंडे, सुतली के दाम भी बढ़े
25 वर्षों से मिट्टी की मूर्ति बनाने वाले देवाराम के अनुसार, जूट के रेशे, बांस के डंडे, सुतली, पीओपी और रंग के दाम भी 15 प्रतिशत तक बढ़े हैं। इसके अलावा मूर्ति बनाने की मेहतन अलग है। प्रतिमाओं को पंडाल तक पहुंचाने का भाड़ा भी महंगा हुआ है।
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यहां पांच से लेकर आठ फीट तक ऊंची प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। घर में स्थापना के लिए छोटी प्रतिमाएं 200 रुपये से भी शुरू है। ढाई फीट की जो प्रतिमा पहले 500 रुपये में तैयार होती थी, अब करीब 800 रुपये की पड़ रही है।
मिट्टी की प्रतिमाओं पर जोर
देहरादून दुर्गाबाड़ी में पिछले 35 वर्षों से प्रतिमा तैयार कर रहे प्रद्युत कुमार ने बताया कि इस बार ढाई से सात फीट तक की पांच प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। सभी प्रतिमाएं मिट्टी से बनाई गई हैं और इनमें पानी वाले रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सुतली की कीमत भी 108 रुपये से बढ़कर 260 रुपये किलो हो गई है, जबकि पराली की लागत करीब डेढ़ गुना बढ़ी है। मिट्टी की उपलब्धता भी चुनौती बनी हुई है। उनका कहना है कि मिट्टी की व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में मूर्तिकारों के सामने कारोबार जारी रखना मुश्किल हो सकता है।
रंग-विरंगी रोशनी से सजने लगे पंडाल
गणेश महोत्सव को लेकर देहरादून में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। विभिन्न क्षेत्रों में पंडाल रंग-विरंगी रोशनी से सज चुके हैं। रविवार देर शाम तक प्रतिमाओं को पंडालों तक पहुंचाने का सिलसिला चलेगा। सोमवार को ढोल-नगाड़ों के साथ नगर परिक्रमा के बाद पूजा-अर्चना कर बप्पा की स्थापना की जाएगी। रात को कई स्थानों पर भजन संध्या का आयोजन होगा।्र
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पटेलनगर से प्रेमनगर तक होंगे आयोजन
पटेलनगर, मन्नूगंज, धामावाला और प्रेमनगर समेत शहर के कई क्षेत्रों में गणपति की स्थापना होगी। आयोजन समितियां अपनी परंपरा के अनुसार तीन, पांच, सात, नौ और 11 दिन तक महोत्सव मनाकर प्रतिमाओं का विसर्जन करेंगी। बाजार में गणेश प्रतिमा और पूजा सामग्री की खरीदारी के लिए भीड़ बढ़ने लगी है।
