देहरादून, जेएनएन। यह सिस्टम की बेरहमी ही है कि जो जुड़वा नवजात पैदा होते ही मौत के आगोश में समा गए, उन्हें करीब 42 दिन बाद मुक्ति मिल पाई है। सोमवार को चंद्रबनी स्थित श्मशान घाट में इनका अंतिम संस्कार किया गया।

दरअसल, पटेलनगर स्थित श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में 19 वर्षीय नीतू ने 22 अक्टूबर को जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। बच्चे जन्म से ही कमजोर थे और उपचार के दौरान दोनों की मौत हो गई। इस बीच महिला भी अस्पताल प्रशासन को बिना बताए गायब हो गई। भर्ती होने के दौरान महिला ने जीएमएस रोड का जो पता और फोन नंबर दर्ज कराया था, वहां भी महिला नहीं मिली। पुलिस ने अस्पताल में दर्ज नंबर पर फोन किया तो नीतू बिहार में थी। उन्होंने कहा कि वह इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं चाहते और पुलिस अपने स्तर पर आवश्यक कदम उठाए। 

इसके बाद महिला ने फोन नंबर बंद कर दिया। अस्पताल प्रशासन ने जिलाधिकारी को पत्र भेज मृत बच्चों का अंतिम संस्कार करने की अनुमति मांगी थी, पर इसमें लंबा वक्त लग गया। इनके शव अस्पताल की मोर्चरी में पड़े थे। बाल संरक्षण आयोग ने इस मामले का संज्ञान लिया और अब तक इस मामले में कार्रवाई न होने पर नाराजगी जाहिर की थी। पटेलनगर बाजार चौकी इंचार्ज गिरीश नेगी ने बताया कि शवों का कोरोनेशन अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया। उसके बाद चंद्रबनी में इनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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Posted By: Sunil Negi

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