यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 19, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
उत्तराखंड में जल्द अस्तित्व में आएगी ड्रोन नीति, पात्रता और शर्तों के साथ संचालन की सीमाएं होंगी तय
यूएवी के निर्माण और इसके बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए सरकार ड्रोन नीति बनाने की तैयारी कर रही है। इसका ...और पढ़ें

राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में ड्रोन अथवा मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) के निर्माण और इसके बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए सरकार ड्रोन नीति बनाने की तैयारी कर रही है। इसका ड्राफ्ट तकरीबन तैयार हो चुका है। इसमें ड्रोन के निर्माण के लिए पात्रता व शर्तों के साथ ही इसके संचालन की सीमाएं भी तय की जा रही हैं। जल्द ही इसे कैबिनेट के सम्मुख लाया जाएगा। अभी ड्रोन उड़ाने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन की अनुमति लेनी होती है।
प्रदेश में सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा ड्रोन के निर्माण व संचालन के लिए ड्रोन एप्लीकेशन एवं अनुसंधान केंद्र (डार्क) का गठन किया गया है। इस केंद्र से अभी तक डार्क ड्रोन, ड्रोन फ्लाइंग परमिशन एप और डार्क मैपर का निर्माण किया गया है। उत्तराखंड में ड्रोन कैमरों का प्रयोग अब हर क्षेत्र में बढ़ रहा है। इसमें फिल्म निर्माण, विवाह समारोह, आपदा राहत कार्य व जमीनों की नापजोख के कार्य भी शामिल हैं।
राज्य में बड़ी संख्या में पर्यटक भी ड्रोन कैमरे का प्रयोग कर रहे हैं। इसे लेकर कई जगह विवाद की स्थिति भी पैदा होती है। इससे निपटने के लिए वर्ष 2019 में सरकार ने ड्रोन की अनुमति के लिए पुलिस और प्रशासन को अधिकृत किया। इसके साथ ही प्रदेश में ड्रोन निर्माण के क्षेत्र को भी एक संभावना के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें युवा स्टार्ट अप शुरू कर सकते हैं। इसे देखते हुए सरकार ड्रोन नीति लाने जा रही है।
कुछ समय पहले केंद्र सरकार भी ड्रोन नीति लागू कर चुकी है, जिसमें ड्रोन निर्माण व संचालन की शर्तों को व्यवहारिक किया गया है। इसी आधार पर प्रदेश में भी व्यवहारिक नियम बनाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि नीति में ड्रोन चलाने के लिए मुक्त क्षेत्र, पूरी तरह प्रतिबंधित और अनुमति लेकर चलाने वाले क्षेत्रों को तय किया जाएगा। प्रमुख सचिव सूचना प्रौद्योगिकी आरके सुधांशु का कहना है कि ड्रोन के क्षेत्र को भविष्य के क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। इसमें व्यवस्था बनाने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
