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दीपावली पर उल्लुओं के शिकार पर रोक, उत्तराखंड में वन विभाग का अलर्ट

Published: Tue, 20 Oct 2026 04:00 PM (IST)

दीपावली पर उल्लुओं के शिकार और तस्करी की आशंका के चलते उत्तराखंड में वन विभाग ने अलर्ट जारी किया है। ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, देहरादून। दीपावली पर वन्यजीवों, विशेषकर उल्लुओं के शिकार और तस्करी की आशंका के दृष्टिगत वन विभाग ने राज्य में अलर्ट जारी कर दिया है। इसके तहत उल्लुओं समेत अन्य निशाचर वन्यजीवों को पकड़ने, उनका शिकार करने, अवैध रूप से अपने कब्जे में रखने और उनके परिवहन व कारोबार पर अंकुश लगाने को विशेष निगरानी शुरू कर दी गई है।

वनाधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त के साथ जरूरत के मुताबिक रात में सघन गश्त के निर्देश दिए गए हैं। प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक नीना ग्रेवाल की ओर से इस संबंध में सभी वन प्रभागों के डीएफओ और संरक्षित क्षेत्रों के निदेशकों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

कहा गया है कि दीपावली के दौरान अंधविश्वास व कथित तांत्रिक गतिविधियों के नाम पर वन्यजीवों का दुरुपयोग किए जाने की आशंका रहती है। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सूचना का सत्यापन और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

वन प्रभागों और संरक्षित क्षेत्रों में पूर्व की घटनाओं, प्राप्त सूचनाओं व स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर संवेदनशील स्थलों, मार्गों, संभावित गतिविधि वाले क्षेत्रों की पहचान कर निगरानी करने और उल्लुओं एवं अन्य निशाचर वन्यजीवों की मौजूदगी वाले इलाकों पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया गया है।

प्रत्येक वन प्रभाग में नोडल अधिकारी

वन्यजीव सुरक्षा के दृष्टिगत प्रत्येक वन प्रभाग और संरक्षित क्षेत्र में नोडल अधिकारी नामित करने को कहा गया है, जो निगरानी और कार्रवाई का समन्वय करेगा। किसी घटना, वन्यजीव की बरामदगी या अपराध की सूचना तत्काल मुख्यालय को देनी होगी। त्योहारों के बाद गश्त, प्राप्त सूचनाओं, दर्ज मामलों, बरामद वन्यजीवों और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मुख्यालय को भेजनी होगी।

यह भी दिए गए हैं निर्देश

-फंदे या जाल से वन्यजीवों को पकड़ने अथवा अवैध रूप से रखने की सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई करें।
-सूचना तंत्र को सक्रिय रखने के साथ सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाए।
-वन्यजीवों के अवैध परिवहन और व्यापार रोकने को संवेदनशील क्षेत्रों में रखें निगरानी।
-बाजारों, मेलों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर भी विशेष चौकसी बरती जाए।
-इंटरनेट मीडिया या अन्य आनलाइन माध्यमों से खरीद-फरोख्त रोकने को उठाएं कदम।
-पुलिस, वन्यजीव अपराध नियंत्रण से जुड़ी एंजेंसियों के साथ समन्वय से हो कार्रवाई।

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