दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से दून की सड़क परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार, इन 8 प्रोजेक्ट में आएगी तेजी
देहरादून में यातायात व्यवस्था पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए आठ प्रमुख परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिनकी कुल लागत लगभग 14 हजार करोड़ रुपये है।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
सुमन सेमवाल, देहरादून। जंक्शन शहर की यातायात व्यवस्था को निरंतर गतिमान रखने में मदद करते हैं, तो जाम का सबसे बड़ा कारण भी बनते हैं। ऐसी स्थिति तब आती है, जब वाहनों का दबाव उनकी डिजाइन क्षमता को पार कर जाता है। राजधानी दून में प्रमुख जंक्शनों पर उनकी डिजाइन क्षमता से छह गुना तक ट्रैफिक का दबाव बढ़ गया है। शहर में चौतरफा बढ़ी आबादी के दबाव में इनका चौड़ीकरण भी एक सीमा से अधिक संभव नहीं।
लिहाजा, चुनौतियों के पहाड़ पर खड़ी यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए एलिवेटेड रोड और रिंग रोड जैसे प्रोजेक्ट ही कारगर साबित होते हैं।
राज्य सरकार की मशीनरी ने इस दिशा में कदम भी बढ़ाए हैं और वर्तमान में करीब 14 हजार करोड़ रुपये की आठ परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए अलग-अलग स्तर और चरण में कार्य गतिमान है। यह बात और है कि हमारी मशीनरी का पूरा ध्यान एक्सप्रेसवे पर रहा और इसके शुरू होने तक एक भी बड़ी परियोजना शहर में शुरू नहीं हो पाई है।
खैर, अब माना जा रहा है कि इस सुस्ती को तोड़ने का काम भी दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे ही करेगा। क्योंकि, रफ्तार के साथ शहर की तरफ वाहनों का दबाव बढ़ने की संभावना के मद्देनजर अब सरकारी मशीनरी भी बड़ी परियोजनाओं की फाइलों पर जमी धूल को तेजी से हटाने लगी है।
शहर की सड़कों को सुकून में लाने के लिए रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड से लेकर मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड और मसूरी बाईपास जैसी परियोजनाओं की समीक्षा तेज कर दी गई हैं। इनकी राह में आ रही बाधाओं को दूर करने की दिशा में मशक्कत की जा रही है। लोनिवि सचिव ने राज्य के राष्ट्रीय राजमार्ग खंडों से लेकर लोनिवि के खंडों से उनके क्षेत्रों में गतिमान और प्रस्तावित परियोजनाओं पर तेजी से अपडेट लेना शुरू कर दिया है। वास्तव में यही वह समय है, जब एक्सप्रेसवे की रफ्तार को ध्यान में रखते हुए अधिकारी भी अपनी कदमताल तेज कर सकते हैं।
इन परियोजनाओं को धरातल पर उतारना ही असली समाधान
आशारोड़ी-मोहकमपुर एलिवेटेड रोड
- कुल लंबाई: 12 किमी।
- कुल बजट: 1400 से 1500 करोड़।
- वर्तमान स्थिति: डीपीआर लगभग तैयार
- विशेषता: एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ेगी और दो स्थानों और बिंदाल और रिस्पना कारिडोर से कनेक्ट होगी।
रिस्पना-बिंदाल कारिडोर (दो परियोजना)
- कुल लंबाई: करीब 26 किमी।
- बजट: लगभग 6200 करोड़।
- वर्तमान स्थिति: जमीन अधिग्रहण की प्रक्रियाधीन।
- विशेषता: मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड को कारगी और रिस्पना पुल क्षेत्र में कनेक्ट करेगी। दोनों के अंतिम सिरे मसूरी रोड से जुड़ेंगे।
आशारोड़ी-झाझरा राजमार्ग
- कुल लंबाई: 11 से 12 किमी।
- बजट: करीब 1600 करोड़ रुपये।
- वर्तमान स्थिति: 50 प्रतिशत काम पूरा।
- विशेषता: एक्सप्रेसवे और पांवटा साहिब राजमार्ग के बीच आवागमन की दशा में बेहतर विकल्प।
मसूरी वैकल्पिक मार्ग
- कुल लंबाई: 42 किमी।
- बजट: 3500 करोड़ रुपये।
- वर्तमान स्थिति: सर्वे कार्य पूरा।
- विशेषता: पांवटा साहिब की तरफ से मसूरी जाने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश से बचाएगी।
लंबिधार किमाड़ी रोड
- कुल लंबाई: 23 किमी।
- बजट: 14 करोड़ रुपये।
- वर्तमान स्थिति: टेंडर प्रक्रिया गतिमान।
- विशेषता: मसूरी के लिए वैकल्पिक मार्ग मिलेगा।
भानियावाला-ऋषिकेश तक चौड़ीकरण
- कुल लंबाई: 20 से 23 किमी।
- बजट: करीब एक हजार करोड़ रुपये।
- वर्तमान स्थिति: कार्य आरंभ हो चुका।
- विशेषता: भानियावाला से आगे ऋषिकेश तक वाहनों के दबाव को अतिरिक्त चौड़ाई देगी।
भंडारी बाग आरओबी
- कुल लंबाई: 575 मीटर।
- बजट: 43 करोड़ रुपये।
- वर्तमान स्थिति: 70 प्रतिशत से अधिक काम पूरा।
- विशेषता: हरिद्वार बाईपास से प्रिंस चौक की तरफ आवागमन के लिए बेहतर विकल्प।
रिस्पना से आराघर तक एलिवेटेड रोड
- कुल लंबाई: करीब 02 किमी।
- बजट: अभी तय नहीं।
- वर्तमान स्थिति: फिजिबिलिटी सर्वे हुआ।
- विशेषता: हरिद्वार राजमार्ग से शहर के भीतर आवागमन का दबाव कम करेगी परियोजना।
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