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Delhi-Dehradun Expressway Accident: एक्सप्रेसवे की नब्ज टटोलकर लौटी टीम, डेढ़ घंटे बाद ही हो गया हादसा

Published: Thu, 05 Nov 2026 10:16 AM (IST)

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के आशारोड़ी-मोहब्बेवाला खंड को डेंजर जोन घोषित किया गया है, जिसका निरीक्षण करने के बाद सेंट्रल रोड रिसर्च ...और पढ़ें

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सुमन सेमवाल, देहरादून। देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे के आशारोड़ी-मोहब्बेवाला के बीच का जो भाग डेंजर जोन बन गया है, उसके सुधार के लिए सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआइ) को उतारा गया है। यह भी अजब संयोग है कि जिस भाग का टीम ने बुधवार को निरीक्षण किया, उसके डेढ़ घंटे बाद ही भीषण हादसा हो गया।

विशेषज्ञ टीम निरीक्षण के बाद कुछ मत बना पाती, उस पर नए सिरे से आकलन की नौबत आ गई। क्योंकि, हादसे के बाद दोबारा डेंजर जोन बने सेक्शन के निरीक्षण का निर्णय लिया गया है।

रंबल स्ट्रिप्स बनाए, जिगजैग में बैरिकेडिंग लगाई

आशारोड़ी से मोहब्बेवाला के बीच के भाग पर हादसों का सिलसिला शुरू होने के बाद देहरादून की जिला सड़क सुरक्षा समिति से लेकर परिवहन विभाग के माध्यम से जेपी रिसर्च इंस्टीट्यूट से भी अध्ययन कराया गया। अध्ययन के अनुसार पूरे सेक्शन में बेहद सख्त रंबल स्ट्रिप्स बनाए गए, जिगजैग में बैरिकेडिंग लगाई गई। ताकि बड़े वाहनों की गति को बेहद सीमित कर दिया जाए।

जब इसके बाद भी हादसों का सिलसिला नहीं थमा तो भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट से भी मदद मांगी। इसके लिए अच्छा खासा भुगतान भी किया गया। इंस्टिट्यूट की चार सदस्यीय टीम ने बुधवार दोपहर दो बजे के आसपास तक पूरे सेक्शन का निरीक्षण किया। अभी टीम लौटी ही थी कि डेढ़ घंटे के भीतर ट्रक के कार के ऊपर पलटने की बड़ी दुर्घटना हो गई।

हादसे के बाद एनएचएआइ के परियोजना निदेशक सौरभ सिंह और अन्य अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। सौरभ सिंह के मुताबिक अब सीआरआरआइ की टीम देर रात भी सड़क का निरीक्षण करेगी। दुर्घटना के कारणों की पड़ताल के साथ ही सड़क के डिजाइन, एलाइनमेंट आदि का भी बारीकी से परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद विशेषज्ञ दल सड़क सुरक्षा की दिशा में अपनी संस्तुति देगा।

आइएसबीटी से डाटकाली टनल तक का होगा आकलन

डेंजर जोन बने सेक्शन में अधिकांश भाग के रखरखाव का जिम्मा अभी राष्ट्रीय राजमार्ग खंड देहरादून के अधीन है। निकट भविष्य में इसका पूरा जिम्मा एनएचएआइ के अधीन होगा।

खंड के अधिशासी अभियंता सुरेश तोमर के अनुसार सड़क सुरक्षा को लेकर एनएचएआइ से समन्वय बनाया जा रहा है। एनएचएआइ से आग्रह किया गया है कि आइएसबीटी से लेकर डाटकाली टनल तक के पूरे आठ किमी भाग का परीक्षण सीआरआरआइ से कराया जाए।

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