कभी भी थम सकते हैं दिल्ली जाने वाली पुरानी बसों के पहिये, करीब 400 बसों पर संकट के बादल
दिल्ली में ग्रैप का पहला चरण लागू होने से उत्तराखंड परिवहन निगम की पुरानी बसों पर प्रतिबंध लग सकता है। ...और पढ़ें

फाइल फोटो

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जागरण संवाददाता, देहरादून। दिल्ली समेत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण नियंत्रण के सख्त नियम उत्तराखंड परिवहन निगम की दिल्ली जाने वाली बस सेवाओं पर भारी पड़ सकते हैं।
ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) का पहला चरण लागू होते ही दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस-छह मानक वाली डीजल बसों को संचालन की अनुमति होगी।
ऐसे में पुराने मानकों वाली बसों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगने से उत्तराखंड रोडवेज की अंतरराज्यीय सेवाओं पर संकट खड़ा हो सकता है। परिवहन निगम ने भी एनसीआर में संभावित प्रतिबंधों को देखते हुए दिल्ली मार्ग पर संचालित बसों की समीक्षा और वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने के निर्देश जारी किए हैं।
बता दें कि निगम की करीब 400 बसें प्रतिदिन दिल्ली जाती हैं। ऐसे में पर्याप्त संख्या में मानक के अनुरूप बसें उपलब्ध नहीं हुईं तो यात्रियों को बसों की कमी और सेवाओं में कटौती का सामना करना पड़ सकता है।
परिवहन निगम के महाप्रबंधक (संचालन) क्रांति सिंह की ओर से गुरुवार को जारी पत्र में एनसीआर में वायु गुणवत्ता के आधार पर लागू होने वाले ग्रैप के चार चरणों का उल्लेख किया गया है।
प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर प्रतिबंध और सख्त हो सकते हैं। ऐसे में निगम को दिल्ली मार्ग पर संचालित बसों के माडल व प्रदूषण मानकों की समीक्षा कर वैकल्पिक बसों की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
करीब 400 बसों के संचालन पर असर की आशंक
उत्तराखंड परिवहन निगम की गढ़वाल मंडल की करीब 250 और कुमाऊं मंडल की 150 बसें प्रतिदिन दिल्ली जाती हैं। इनमें साधारण बसों के साथ प्रीमियम श्रेणी की बसें भी शामिल हैं।
पुराने मानकों वाली बसों पर रोक लगने से दिल्ली मार्ग के साथ दिल्ली होकर अन्य शहरों को जाने वाली सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। निगम ने अधिकारियों को मानक के अनुरूप बसों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ वैकल्पिक व्यवस्था की रिपोर्ट मुख्यालय को भेजने को कहा गया है।
200 नई बसें खरीदने की मांग
रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश उपमहामंत्री विपिन बिजल्वाण ने निगम से तत्काल कम से कम 200 नई बीएस-छह बसें खरीदने की मांग की है। उन्होंने कहा कि निगम के प्रबंध निदेशक की ओर से भी गुणवत्ता और आरामदायक 200 बसों की खरीद का आश्वासन दिया गया है।
खरीद प्रक्रिया जल्द शुरू की जानी चाहिए। बसें केवल संख्या बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि यात्री सुविधा, सुरक्षा, गुणवत्ता, माइलेज और रखरखाव की लागत को ध्यान में रखकर खरीदी जानी चाहिए। उन्होंने टाटा मार्कोपोलो और अशोक लेलैंड की उच्च गुणवत्ता वाली बसों पर विचार करने का सुझाव दिया।
पुरानी बसों को दूसरे मार्गों पर लगाने की तैयारी
परिवहन निगम ने डिपो अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिन बसों के पास दिल्ली में संचालन के लिए निर्धारित प्रदूषण मानक या वैध प्रमाणपत्र नहीं हैं, उन्हें दिल्ली मार्ग पर न चलाया जाए। पुरानी बसों को अन्य मार्गों पर लगाने की संभावना भी समीक्षा का हिस्सा होगी।
